AI Lessons For Classes 9 to 12 – Special Training On Identifying Deepfakes : New Module from NCERT
NCERT का AI और Computational Thinking मॉड्यूल: विद्यार्थियों में डिजिटल समझ विकसित करने पर जोर
नई दिल्ली | 26 अक्टूबर 2026
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा स्कूली विद्यार्थियों के बीच Computational Thinking (CT) और Artificial Intelligence (AI) की समझ विकसित करने से जुड़ी पहल की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 20 घंटे का एक प्रारंभिक मॉड्यूल तैयार किया गया है। इसमें दैनिक जीवन में AI के उपयोग, मशीनों के उदाहरणों से सीखने, डीपफेक की पहचान और व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता जैसे विषय शामिल बताए गए हैं।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक की बुनियादी समझ देना और AI से प्राप्त जानकारी का आलोचनात्मक मूल्यांकन करने के लिए प्रोत्साहित करना है। हालांकि, मॉड्यूल की अवधि, लक्षित कक्षाओं और इसकी आधिकारिक स्थिति की पुष्टि संबंधित NCERT दस्तावेजों से की जानी चाहिए।
Computational Thinking क्या है?
Computational Thinking समस्याओं को व्यवस्थित तरीके से समझने, उन्हें छोटे और प्रबंधनीय हिस्सों में विभाजित करने तथा संभावित समाधान तलाशने की एक पद्धति है। इससे विद्यार्थियों को तार्किक ढंग से सोचने और जटिल समस्याओं को चरणबद्ध तरीके से हल करने में मदद मिल सकती है।
AI की बुनियादी जानकारी के साथ विद्यार्थियों के लिए यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि तकनीक किस प्रकार काम करती है, उसकी सीमाएं क्या हैं और किन परिस्थितियों में उसके परिणाम गलत हो सकते हैं।
डीपफेक और गलत जानकारी की पहचान
AI की मदद से ऐसी तस्वीरें, वीडियो और ऑडियो तैयार किए जा सकते हैं जो वास्तविक दिखाई दें, लेकिन भ्रामक हों। इस प्रकार की सामग्री को पहचानना और उसकी विश्वसनीयता की जांच करना डिजिटल साक्षरता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विद्यार्थियों को किसी भी AI-जनित जानकारी पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय उसके स्रोत की जांच करने और विश्वसनीय माध्यमों से तथ्यों की पुष्टि करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
व्यक्तिगत डेटा और डिजिटल सुरक्षा
डिजिटल प्लेटफॉर्म और AI टूल का इस्तेमाल करते समय व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा पर ध्यान देना आवश्यक है। विद्यार्थियों को ऑनलाइन संवेदनशील जानकारी साझा करने में सावधानी बरतने, डेटा का जिम्मेदारी से उपयोग करने और डिजिटल सुरक्षा के बुनियादी नियमों को समझने की जरूरत है।
AI सिस्टम के परिणामों में संभावित पूर्वाग्रहों को पहचानना भी महत्वपूर्ण है। इससे विद्यार्थी तकनीक से प्राप्त जानकारी का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करना सीख सकते हैं।
बिना डिजिटल उपकरणों के भी सीखने की संभावना
AI और Computational Thinking की अवधारणाओं को केवल डिजिटल उपकरणों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि कक्षा में चर्चा, गतिविधियों, उदाहरणों और व्यावहारिक अभ्यासों के जरिए भी समझाया जा सकता है। ऐसा दृष्टिकोण विभिन्न संसाधनों वाले स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए सीखने के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक हो सकता है।
तकनीक के साथ मानवीय सोच का महत्व
AI का उपयोग बढ़ने के साथ स्वतंत्र सोच, रचनात्मकता, तार्किक विश्लेषण और नैतिक निर्णय लेने की क्षमता का महत्व भी बढ़ रहा है। विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग करते समय उसके लाभों के साथ-साथ उसकी सीमाओं और संभावित जोखिमों को समझना चाहिए।
NCERT के इस मॉड्यूल से संबंधित आधिकारिक जानकारी और दिशा-निर्देशों की पुष्टि होने के बाद इसकी विषयवस्तु, कार्यान्वयन और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध गतिविधियों के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
