बिष्टूपुर में तीन दिवसीय कथा महोत्सव का शुभारंभ, संत ग्वाल श्री जी महाराज ने गौ माता के महत्व पर दिया संदेश
श्री गोकृपा कथा महोत्सव में गूंजा गौ सेवा और सनातन संस्कृति का संदेश
जमशेदपुर। गौ भक्ति, सनातन संस्कृति और गौ सेवा के संदेश के साथ जमशेदपुर में तीन दिवसीय श्री गोकृपा कथा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। पूरी सिंहभूम जिला अग्रवाल सम्मेलन, ध्यान फाउंडेशन एवं श्री गोपाल परिवार संघ के संयुक्त तत्वावधान में बिष्टूपुर स्थित कुसुमकामिनी ऑडिटोरियम में आयोजित महोत्सव के पहले दिन संत ग्वाल श्री जी महाराज ने विधिवत गौ पूजन के साथ कथा का शुभारंभ किया। ध्यान फाउंडेशन के निदेशक राजकुमार अग्रवाल एवं उनकी धर्मपत्नी ने गौ पूजन किया। मंच पर नंदी की विशेष उपस्थिति भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही।
कथा के प्रथम दिन संत ग्वाल श्री जी महाराज ने भारतीय सनातन संस्कृति में गौ माता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गौ माता परमात्मा का जीवंत स्वरूप हैं। उन्होंने गौ माता को जीवंत देवालय और चिकित्सालय बताते हुए कहा कि गोवंश भारतीय जीवन पद्धति और सनातन संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।
संत ग्वाल श्री जी महाराज ने कहा कि गौ सेवा केवल किसी आयोजन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे नियमित सेवा और संरक्षण से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल गौशाला बनाना ही समाधान नहीं है, बल्कि प्रत्येक हिंदू परिवार को अपने स्तर पर गौ सेवा और संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने गौ सेवा को साधना बताते हुए समाज से गोवंश के संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कथा के दौरान बताया गया कि गौ सेवा और संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से संत ग्वाल श्री जी महाराज अब तक 83 हजार किलोमीटर से अधिक की पैदल यात्रा कर चुके हैं। उनके सरल जीवन और गौ सेवा के प्रति समर्पण का भी उल्लेख किया गया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और पूरे ऑडिटोरियम में भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
प्रथम दिवस के कार्यक्रम में मुख्य रूप से पूर्व राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश रांची, ध्यान फाउंडेशन के निर्देशक राजकुमार अग्रवाल,उमेश कांवटिया, दीपक भालोटिया, मुरलीधर केडिया, कमल किशोर अग्रवाल समेत कई और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
दूसरे दिन संस्कृति और संस्कार पर चर्चा
महोत्सव के दूसरे दिन संत ग्वाल श्री गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और नई पीढ़ी के बीच भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों से जुड़ाव के विषय पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज बच्चे आधुनिक और पश्चिमी प्रभाव वाली शिक्षा व्यवस्था के बीच आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में उन्हें गोवंश, भारतीय संस्कृति, संस्कार और सनातन परंपराओं की जानकारी देना भी समाज की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना जरूरी है। संत ने गौ महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके मत में गौ केवल एक पशु नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड और तैंतीस कोटि देवी-देवताओं की अधिष्ठान शक्ति हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से गौ सेवा को जीवन का हिस्सा बनाने और आने वाली पीढ़ी को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। साथ ही गोवंश की सेवा को परिवार और समाज के हित से जोड़कर देखने की बात कही।
दूसरे दिन की कथा में मुख्य रूप से झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं ओडिशा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अभय सिंह और मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।