विजयदशमी पर आरएसएस का अस्त्र - शस्त्र पूजन, पथ संचलन में दिखा अनुशासन और राष्ट्रसेवा का संकल्प
जमशेदपुर में आरएसएस का विजयदशमी उत्सव, अस्त्र-शस्त्र पूजन और पथ संचलन आयोजित
जमशेदपुर। विजयदशमी के अवसर पर जमशेदपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से विजयदशमी उत्सव एवं अस्त्र-शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में शामिल हुए। इस दौरान मां दुर्गा और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के चित्रों के साथ पारंपरिक अस्त्र-शस्त्रों का पूजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और शंख ध्वनि के साथ हुई। पुरोहितों के मार्गदर्शन में अस्त्र-शस्त्रों पर रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित किए गए। इसके बाद भगवा ध्वज का ध्वजारोहण हुआ। स्वयंसेवकों ने एकल और सामूहिक गीत प्रस्तुत किए।
विजयदशमी के संदेश पर चर्चा
बौद्धिक सत्र में वक्ताओं ने विजयदशमी को सत्य की असत्य पर और धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक बताया। उन्होंने इस दिन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस के रूप में भी महत्वपूर्ण बताया।
वक्ताओं ने कहा कि शस्त्र पूजन को आत्मरक्षा, समाज की सुरक्षा और राष्ट्रहित के प्रति प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिए। इस दौरान स्वयंसेवकों से राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। संघ की ओर से बताए गए ‘पंच परिवर्तन’ के विषयों पर भी चर्चा हुई। स्वयंसेवकों ने शारीरिक अभ्यास और योग से जुड़े प्रदर्शन किए।
घोष की धुन पर निकला पथ संचलन
कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा पथ संचलन रहा। स्वयंसेवक अनुशासित कतारों में निर्धारित मार्ग से आगे बढ़े। मार्ग में स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।
कार्यक्रम का समापन संघ प्रार्थना के साथ हुआ, जिसके बाद उपस्थित लोगों के बीच प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन में स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों सहित शहर के कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।