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पितृपक्ष महासंगम: वेदियों पर प्रशासन का पहरा, आस्था और व्यवस्था का अद्भुत संगम,

By VIJAY KUMAR • 2026-09-29 05:52 • 9 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
पितृपक्ष महासंगम:  वेदियों पर प्रशासन का पहरा, आस्था और व्यवस्था का अद्भुत संगम,

विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
28सितम्बर 2026,
गयाजी : ​मोक्ष और श्रद्धा की पावन धरा ‘गया जी’ में पितृपक्ष महासंगम 2026 इस समय अपने पूरे उत्कर्ष पर है।
पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और पिंडदान के जरिए मोक्ष दिलाने की सनातन परंपरा के तहत देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गयाजी और बोधगया की पावन वेदियों पर पहुंच रहे हैं।
ऐसे विशाल मानवीय समागम में जहाँ एक छोटी सी प्रशासनिक चूक बड़ी अव्यवस्था का रूप ले सकती है, वहीं गया जिला प्रशासन की मुस्तैदी और अग्रिम योजनाबद्ध कार्यशैली एक मिसाल बनकर उभर रही है।

​पितृपक्ष मेले के चौथे दिन बोधगया स्थित ऐतिहासिक मातंगवापी, धर्मारण्य और सरस्वती वेदियों पर जिलाधिकारी शशांक शुभंकर और वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार की संयुक्त जमीनी मौजूदगी ने एक स्पष्ट संदेश दिया है—श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।

​फाइलों से निकलकर धरातल पर उतरी प्रशासनिक चौकसी:
​अक्सर देखा जाता है कि बड़े मेलों और आयोजनों में निर्देश वातानुकूलित कमरों और समीक्षा बैठकों तक सीमित रह जाते हैं। किंतु गया में परिदृश्य पूरी तरह बदला हुआ है। डीएम और एसएसपी स्वयं पसीना बहाते हुए वेदियों, तंबुओं और तीर्थयात्रियों की कतारों के बीच जा रहे हैं।

​सफाई व्यवस्था की निरंतरता, शुद्ध पेयजल की निर्बाध आपूर्ति, समुचित प्रकाश, स्वास्थ्य शिविर और सुचारू यातायात प्रबंधन का एक-एक बिंदु पर सूक्ष्म निरीक्षण यह साबित करता है कि प्रशासन “अतिथि देवो भव:” के मूलमंत्र को चरितार्थ कर रहा है।

​सुरक्षा, सेवा और शून्य-शिकायत का संकल्प :
​एक तरफ जहाँ आईपीएस सुशील कुमार के नेतृत्व में त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा, सीसीटीवी सर्विलांस और ड्रोन निगरानी के जरिए सुरक्षा को अभेद्य बनाया गया है, वहीं दूसरी तरफ डीएम शशांक शुभंकर की अगुवाई में कंट्रोल रूम से 24×7 निगरानी और शिकायतों का ऑन-द-स्पॉट निवारण सुनिश्चित किया जा रहा है।

​पंडा-पुरोहितों, स्थानीय नागरिकों और स्वयंसेवी संगठनों के साथ संवाद बनाकर प्रशासन ने विश्वास का ऐसा वातावरण तैयार किया है, जिससे देश के कोने-कोने से आए वृद्ध और अशक्त श्रद्धालु भी बिना किसी भय या संकोच के अपने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर पा रहे हैं।

​निष्कर्ष: अनुकरणीय नेतृत्व,
​गयाजी का पितृपक्ष महासंगम केवल एक धार्मिक मेला नहीं, बल्कि बिहार के प्रशासनिक सामर्थ्य और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का राष्ट्रीय मंच है।

चौथे दिन की यह संयुक्त निगरानी यह रेखांकित करती है कि जब प्रशासनिक नेतृत्व स्वयं मोर्चे पर डट जाता है, तो व्यवस्था स्वतः अनुशासित और पारदर्शी बन जाती है।
इस प्रकार की जमीनी सजगता से न केवल मेले का सफल और शांतिपूर्ण समापन सुनिश्चित होगा, बल्कि गयाजी की पावन छवि वैश्विक पटल पर और अधिक गौरवमयी बनेगी।

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