✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से

कभी इतिहास से सीख लेने की बात करने वाले नेता,अब इतिहास को अपने भाषणों की कहानी बना चुके हैं।कभी जो घटनाएँ हमें जोड़ने के लिए थीं,वो अब वोट बैंक के हिसाब से तोड़ी-मरोड़ी जा रही हैं।

सत्ताधारी वर्ग ने अपने चतुर शब्दों से जनता को फिर से वही दिखाया —कि असली समस्या बेरोज़गारी, महँगाई या शिक्षा नहीं,बल्कि “कौन कौन था” और “कौन कौन बन गया” है।

आज का नागरिक खुद से पूछे —इतिहास में कौन जीता, कौन हारा, इससे देश नहीं चलता;देश तब चलता है जब वर्तमान सच बोलने की हिम्मत रखता है।लेकिन अफसोस —हमने सवाल पूछने छोड़े और नारे दोहराने शुरू कर दिए।

राजनीति का कमाल यह है किहर गलती का दोष “अतीत” पर डाल दो,
हर असफलता को “भावना” में बदल दो,और जनता को “गर्व” के नशे में इतना डुबो दोकि उसे अपनी जेब खाली होने का भी एहसास न हो।

देश की असली ताकत धर्म, जाति या नामों में नहीं,न्याय, शिक्षा और समानता की नीति में है।पर जब तक जनता ताली बजाती रहेगी और सवाल नहीं पूछेगी,तब तक कोई भी सरकार इतिहास लिखेगी,
और हम बस इतिहास बनते रहेंगे।

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