‘ऊर्जा संरक्षण’ ऐसे प्रयासों को संदर्भित करता है, जिनके माध्यम से किसी विशेष उद्देश्य के लिये कम ऊर्जा का उपयोग करके ऊर्जा का कुशलतापूर्वक संरक्षण सुनिश्चित किया जाता है- जैसे बल्ब और पंखों का यथा संभव कम उपयोग करना- या किसी विशेष सेवा के उपयोग को कम किया जाता है- जैसे कम ड्राइविंग और इसके बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना, ताकि ऊर्जा संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। ऊर्जा संरक्षण एक सचेत, व्यक्तिगत प्रयास है और वृहद स्तर पर यह ऊर्जा दक्षता की ओर ले जाता है। ऊर्जा संरक्षण का अंतिम लक्ष्य स्थायी ऊर्जा उपयोग की ओर पहुँचना है। गौरतलब है कि यह ‘ऊर्जा दक्षता’ शब्द से अलग है, जिसके तहत ऐसी तकनीक का उपयोग किया जाता है जिसमें समान कार्य करने हेतु कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001: अधिनियम भारतीय अर्थव्यवस्था की ऊर्जा तीव्रता को कम करने के लक्ष्य के साथ अधिनियमित किया गया था। यह निम्नलिखित के लिये विनियामक अधिदेश प्रदान करता है: उपकरणों की मानक और लेबलिंग; वाणिज्यिक भवनों हेतु ऊर्जा संरक्षण कोड तथा ऊर्जा गहन उद्योगों के लिये ऊर्जा खपत मानदंड।
ऊर्जा संरक्षण सप्ताह: विद्युत मंत्रालय द्वारा 14 से 20 दिसंबर 2025 तक ऊर्जा संरक्षण सप्ताह हर साल मनाया जाता है।
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