✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल

हिंदू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणियां, असामाजिक तत्व बेलगाम — सवर्ण आर्मी की दो टूक चेतावनी: “अब भी नहीं चेती सरकार तो हालात बेकाबू होंगे”

सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर स्वयं को अधिवक्ता बताने वाले एक व्यक्ति द्वारा बार-बार हिंदू धर्म, देवी-देवताओं और समाज के कुछ वर्गों के विरुद्ध की जा रही अशोभनीय और उकसाने वाली टिप्पणियों ने पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में गंभीर आक्रोश पैदा कर दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि वीडियो और बयानों के खुलेआम प्रसारित होने के बावजूद अब तक कोई ठोस सरकारी कार्रवाई सामने नहीं आई

विभिन्न हिंदू सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह केवल धार्मिक अपमान का मामला नहीं, बल्कि सुनियोजित रूप से सामाजिक सौहार्द को तोड़ने की कोशिश है। लंबे समय से विशेष रूप से हिंदू धर्म, ब्राह्मण एवं राजपूत समाज को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर गाली-गलौज, अपमान और वैमनस्य फैलाया जा रहा है, जिसे सत्ता का मौन संरक्षण मिल रहा है।

सवर्ण आर्मी का सीधा आरोप: इस पूरे प्रकरण पर सवर्ण आर्मी मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष पं. विकास दुबे जी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा—वर्तमान भाजपा सरकार एक वर्ग विशेष को इतनी खुली छूट दे रही है कि देश सामाजिक विद्रोह की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। यदि समय रहते ऐसे असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाला समय देश के लिए बेहद खतरनाक होगा।”उन्होंने स्पष्ट कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर धार्मिक अपमान, सामाजिक विद्वेष और जातिगत नफरत को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

बढ़ती चिंता, गहराता असंतोष:सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि एक धर्म विशेष के खिलाफ लगातार जहर उगला जाएगा और प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहेगा, तो इसका परिणाम गंभीर सामाजिक टकराव के रूप में सामने आ सकता है।इतिहास गवाह है कि जब सरकारें समय रहते हस्तक्षेप नहीं करतीं, तो असंतोष विस्फोट का रूप ले लेता है।

सरकार के लिए अंतिम चेतावनी:

अब सवाल साफ है—

  • क्या कानून केवल चुनिंदा लोगों के लिए है?
  • क्या धार्मिक भावनाओं की कोई कीमत नहीं?
  • क्या सरकार सामाजिक शांति बनाए रखने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाएगी?

सामाजिक संगठनों ने सरकार से तत्काल, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए चेताया है कि यदि अब भी ऐसे तत्वों पर लगाम नहीं लगी, तो देश को इसकी भारी सामाजिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

 

 

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