May 20, 2026

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026: एनजीओ फंडिंग और संपत्तियों को लेकर नई बहस

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मार्च 2026 में लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (Foreign Contribution Regulation Amendment Bill, 2026) पेश किया है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य विदेशी नागरिकों या संस्थाओं से प्राप्त होने वाले धन की निगरानी को अधिक सख्त बनाना और उससे निर्मित संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं को स्पष्ट करना बताया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इससे पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी, जबकि कई नागरिक समाज संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) ने इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की है। फिलहाल संसद के बजट सत्र में इस पर चर्चा स्थगित कर दी गई है, लेकिन इसके प्रावधानों को लेकर बहस जारी है।

क्या है प्रस्तावित संशोधन?

प्रस्तावित विधेयक में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव एनजीओ की संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़ा है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, किसी संस्था का एफसीआरए (FCRA) पंजीकरण रद्द होने की स्थिति में ही सरकार उसके विदेशी अंशदान से जुड़ी संपत्तियों पर नियंत्रण कर सकती है। नए संशोधन में “नामित प्राधिकरण” (Designated Authority) और प्रशासक नियुक्त करने का प्रावधान शामिल किया गया है।

विधेयक के अनुसार, यदि किसी संस्था का पंजीकरण रद्द हो जाता है, वह स्वयं पंजीकरण सरेंडर करती है, या समय पर नवीनीकरण नहीं होने के कारण समाप्त हो जाता है, तो उसकी विदेशी निधि और उससे निर्मित संपत्तियां अस्थायी रूप से सरकारी प्राधिकरण के नियंत्रण में जा सकती हैं। यदि संस्था निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण बहाल कराने में असफल रहती है, तो आगे की कार्रवाई कानून के प्रावधानों के अनुसार की जा सकती है।

मिश्रित फंडिंग को लेकर चिंता

विधेयक का एक महत्वपूर्ण पहलू उन संपत्तियों से संबंधित है जो आंशिक रूप से विदेशी और आंशिक रूप से घरेलू फंडिंग से बनाई गई हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे कई सामाजिक संस्थाओं के लिए प्रशासनिक और कानूनी जटिलताएं बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक लागू होता है, तो कई संगठन विदेशी फंड का उपयोग स्कूल, अस्पताल या अन्य दीर्घकालिक परियोजनाओं के निर्माण में करने से बच सकते हैं। इससे सामाजिक क्षेत्र की दीर्घकालिक विकास परियोजनाओं पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

जवाबदेही और जांच प्रक्रिया

प्रस्तावित संशोधन में “प्रमुख पदाधिकारी” (Key Functionary) की परिभाषा का दायरा भी बढ़ाया गया है। इसके तहत ट्रस्टियों, निदेशकों, पदाधिकारियों और संस्थागत नियंत्रण रखने वाले अन्य व्यक्तियों को भी जवाबदेही के दायरे में शामिल किया जा सकता है।

साथ ही, एफसीआरए उल्लंघन से जुड़े मामलों में राज्य पुलिस या अन्य जांच एजेंसियों को कार्रवाई शुरू करने से पहले केंद्र सरकार से अनुमति लेने का प्रावधान भी प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त, समाचार और समसामयिक विषयों से जुड़े कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और व्यक्तियों के विदेशी फंड प्राप्त करने पर भी प्रतिबंध संबंधी प्रावधान शामिल किए गए हैं।

राहत से जुड़े प्रावधान

विधेयक में कुछ राहत संबंधी बदलाव भी प्रस्तावित हैं। तकनीकी या छोटे प्रशासनिक उल्लंघनों के मामलों में अधिकतम कारावास अवधि को पांच वर्ष से घटाकर एक वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही जुर्माने की प्रक्रिया को भी अधिक संतुलित बनाने की बात कही गई है।

निष्कर्ष

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर देशभर में व्यापक चर्चा जारी है। सरकार इसे पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बता रही है, जबकि कई सामाजिक संगठन इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। आने वाले समय में संसद में होने वाली चर्चा और अंतिम प्रावधानों पर सभी की नजर बनी हुई है।

Written by

MANOJ SHRIVASTAVA

District Reporter

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