₹16 करोड़ के नंदा की चौकी पुल की एप्रोच धंसी, सरकार का बड़ा एक्शन PWD के तीन इंजीनियर निलंबित, निर्माण कंपनी को भविष्य के टेंडरों से किया गया बाहर
देहरादून। प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी के पास टौंस नदी पर करीब ₹16 करोड़ की लागत से निर्मित नए पुल की एप्रोच रोड धंसने के मामले में सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। पुल को यातायात के लिए खोले जाने के कुछ ही दिनों बाद 28 जुलाई को भारी बारिश के दौरान एप्रोच रोड का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। घटना के बाद निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी डिजाइन और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल उठे।
मामले की प्रारंभिक जांच में तकनीकी कमियों और निर्माण कार्य की निगरानी में लापरवाही की बात सामने आने के बाद PWD के तीन इंजीनियरों—एक अधिशासी अभियंता (EE), सहायक अभियंता (AE) और कनिष्ठ अभियंता (JE)—को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही संबंधित निर्माण कंपनी हिमालयन कंस्ट्रक्शन को PWD के भविष्य के टेंडरों में भाग लेने से रोक दिया गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि नदी के बहाव को नियंत्रित करने तथा आवश्यक रिवर ट्रेनिंग और सुरक्षा उपायों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। नदी का बहाव एक तरफ मुड़ने से कटाव बढ़ा और इसके परिणामस्वरूप एप्रोच रोड को नुकसान पहुंचा। PWD के प्रमुख को डिजाइन कंसल्टेंट के खिलाफ भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस पुल पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, वह यातायात के लिए खोले जाने के महज कुछ दिनों बाद ही गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कैसे हो गया? घटना ने सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण, डिजाइन की जांच और इंजीनियरिंग निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकार की कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि सार्वजनिक धन से बनने वाली परियोजनाओं में लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अब जरूरत इस बात की है कि पुल की मरम्मत के साथ-साथ जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी पूरी पारदर्शिता के साथ सामने लाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।