चार दिन से आगरा शहर में गहराया भीषण जल संकट
आगरा ब्रेकिंग:
आगरा में पिछले चार दिनों से पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। महानवमी और नवरात्र जैसे पावन पर्व के दौरान लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ा। बुलंदशहर के पालड़ा झाल से आगरा और मथुरा के लिए होने वाली गंगाजल की आपूर्ति तय समय से पहले रोके जाने के कारण यह गंभीर संकट पैदा हुआ है। हालात यह रहे कि शहर के 55 वार्डों के 12 लाख से अधिक लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते नजर आए।
16 अक्टूबर को ही रोक दी गई थी गंगाजल की आपूर्ति:
नियमानुसार, ऊपरी गंगा नहर की सालाना सफाई के चलते 21 अक्टूबर से 8 नवंबर तक नहर को बंद किया जाना था। जलनिगम के अधिकारियों ने सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता (गंगा) को पत्र लिखकर मध्य गंगा नहर शुरू कराने का अनुरोध भी किया था, ताकि पालड़ा को आगरा और अलीगढ़ के कासिमपुर प्लांट के लिए पानी मिलता रहे। इसके बावजूद, 16 अक्टूबर को ही अचानक ऊपरी गंगा नहर से गंगाजल की आपूर्ति रोक दी गई। पालड़ा झाल से आगरा और मथुरा को पाइपलाइन के जरिए कुल 150 क्यूसेक पानी मिलता है, जिसमें से अकेले आगरा को 140 क्यूसेक पानी प्रतिदिन मिलता है। आपूर्ति ठप होने से जल संस्थानों की व्यवस्था चरमरा गई।
जीवनीमंडी और सिकंदरा वाटरवर्क्स की उत्पादन क्षमता प्रभावित:
गंगाजल की आपूर्ति रुकने का सीधा असर दोनों प्रमुख जलघरों पर पड़ा। जीवनीमंडी से आधा और सिकंदरा वाटरवर्क्स से केवल एक तिहाई पानी की ही सप्लाई हो पाई। सिकंदरा वाटरवर्क्स में 144 एमएलडी क्षमता का इजरायली तकनीक पर आधारित एमबीबीआर (MBBR) प्लांट है जो यमुना के पानी का शोधन करता है, और दूसरा 144 एमएलडी क्षमता का गंगाजल प्लांट है। गंगाजल में कमी के कारण यमुना जल का एमबीबीआर प्लांट पूरी क्षमता से चलाया जाना था, लेकिन यह केवल आधी क्षमता यानी 72 एमएलडी पर ही चल सका। प्रेशर न होने के कारण शहर के तमाम जोनल पंपिंग स्टेशनों के जलाशय और टंकियां भी देरी से भर पा रही हैं।
पार्षदों और जनता में आक्रोश, बुधवार तक राहत का दावा:
क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस संकट पर कड़ा रोष जताया है। राजामंडी की पार्षद मंजू प्रजापति ने कहा कि यदि सिकंदरा प्लांट पूरी क्षमता से चलाया जाता और जीवनीमंडी में यमुना जल शोधित कर भेजा जाता तो लोगों को यह परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। वहीं पीपलमंडी के पार्षद रवि माथुर और महावीर नगर के ब्रजेश त्यागी ने भी त्योहारों के समय जलापूर्ति रोके जाने पर नाराजगी जताई।
सोमवार को 68 टैंकरों के जरिए शहर में पानी पहुँचाने का प्रयास किया गया, लेकिन पुराने शहर की तंग और संकरी गलियों में लोगों के घरों तक टैंकर नहीं पहुँच सके। इस बीच, राहत की खबर यह है कि बिजनौर से मध्य गंगा नहर में रेगुलेटर के जरिए पानी छोड़ दिया गया है जो सोमवार रात तक पालड़ा झाल पहुँच चुका है। जलकल महाप्रबंधक कुमार गौरव ने बताया कि मध्य गंगा नहर से सप्लाई शुरू होने का असर बुधवार से नजर आएगा और जलापूर्ति सामान्य हो जाएगी।