महिला आयोग द्वारा आयोजित जनसुनवाई मे 13 मामलों मे 6 की ही हो पाई जनसुनवाई कारण दूसरे पक्षकार नहीं रहे मौजूद
महिला आयोग जनसुनवाई - बिलासपुर
महिला आयोग में सुनने थे 13 मामले, 6 ही सुने गए, 5 की डेट बढ़ी, वजह- दूसरा पक्ष नहीं आया
अध्यक्ष डॉ. ममता साहू की पहली जनसुनवाई, पक्षकारों की गैरमौजूदगी से उठे सवाल
बिलासपुर -छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की नई अध्यक्ष डॉ. ममता साहू की अध्यक्षता में सोमवार को हुई पहली जनसुनवाई में ही आयोग के सामने प्रकरणों की सुनवाई को लेकर बड़ी चुनौती सामने आई। जनसुनवाई के लिए कुल 13 प्रकरण निर्धारित थे, लेकिन इनमें से केवल 6 प्रकरणों पर ही सुनवाई हो सकी। इन छह मामलों में भी सिर्फ एक प्रकरण ऐसा रहा, जिसमें आवेदिका और अनावेदक दोनों पक्ष आयोग के सामने मौजूद हुए। हालांकि इनके बीच समझौता भी हो गया। बाकी मामलों में किसी न किसी पक्ष की गैरमौजूदगी के कारण सुनवाई अधूरी रह गई।
प्रार्थना सभा कक्ष में हुई सुनवाई, जिस मामले में प्रक्रिया पूरी, उसमें दंपती साथ रहने को राजी हुए। जन संसाधन विकास स्थित प्रार्थना भवन में महिला आयोग की सुनवाई में महिला उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों को रखा गया था। एक मामले में पति का दूसरे महिला से अवैध संबंध था, जिसकी शिकायत पत्नी ने आयोग से की थी। बाद में दोनों के परिजनों से समझाकर मामला सुलझा लिया और पति-पत्नी साथ रहने राजी हो गए। तब उन्होंने आयोग से मामले को निरस्त करने की मांग की। आयोग ने ऐसा ही किया। यानी छह मामलों में यही एक मामला था, जिसमें आयोग दोनों पक्षों को आमने-सामने सुनकर निष्कर्ष तक पहुंच सका।
धर्म परिवर्तन वाला मामला भी अधूरा
धर्म परिवर्तन से जुड़े प्रकरण में आवेदिका सुनवाई में नहीं पहुंची, जबकि अनावेदक पक्ष के लोग मौजूद रहे। आयोग ने फोन से संपर्क किया, लेकिन निर्धारित समय तक आवेदिका नहीं आई। इसके बाद महिला के ससुराल वालों की बात सुनी गई। इसी दौरान आवेदिका की ओर से अलग-अलग जगह पर की गई शिकायत और धर्म परिवर्तन से जुड़े तथ्य सामने आए। आयोग ने सिविल लाइन थाने से मामले की जानकारी लेने और तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। अगली सुनवाई में आवेदिका को बुलाने, लेकिन अनावेदक पक्ष को नहीं बुलाने का निर्णय लिया गया।
कही पति नहीं पहुंचा, कहीं तारीख को लेकर गलतफहमी
भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में आवेदिका तो उपस्थित हुई, लेकिन अनावेदक नहीं पहुंचा। पता चला कि मामला पहले से न्यायालय में लंबित है। दूसरी पत्नी से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद आयोग ने आवेदिका के अधिवक्ता से चर्चा कर मामले को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
अफसरों का दावा- हर एक तक पहुंचाई गई थी सुनवाई की सूचना। हर आयोग की जनसुनवाई को लेकर पहले ही सूचना दिए जाने का दावा आयोग की अध्यक्ष डॉ. साहू के पीए बृजेश शुक्ला ने किया। उन्होंने बताया कि हर केस की जानकारी भी पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग को दी जाती है। वहीं, महिला एवं बाल विकास विभाग में घरेलू हिंसा के केस देखने वाली सीमा गोस्वामी का भी कहना है कि हर आवेदिका व अनावेदक को तारीख के संबंध में जानकारी दी गई थी। आज भी सुबह इस संबंध में बताया गया था। किसी ने चंद्रखुरी तबादला होने तो किसी ने पलायन पर जाने की जानकारी दी।
डॉ. ममता साहू, अध्यक्ष, महिला आयोग - "संसर्ग की जगह जिला स्तर के मामले सुनवाई में रखे गए इसलिए संख्या कम रखी। आयोग के कर्मचारी को पहली गलती होने के कारण उसे माफ किया गया है। मैं लगातार व्यस्त रही इसलिए इस पर नजर नहीं रख पाई। भविष्य में इसे सुधारा जाएगा। 6 नहीं 9 मामलों में सुनवाई हुई है।"