चीन की सैन्य ताकत पर ITBP प्रमुख का बड़ा बयान: ‘पारंपरिक तरीकों से मुकाबला कठिन’, ड्रोन तकनीक पर भारत का जोर
चीन की सैन्य ताकत पर ITBP प्रमुख का बयान: ‘पारंपरिक तरीकों से मुकाबला कठिन’, ड्रोन तकनीक पर भारत का जोर
नई दिल्ली | राष्ट्रीय डेस्क | 25 अक्टूबर 2026
भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने आधुनिक युद्ध तकनीक और सीमा सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि चीन ने अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के आधुनिकीकरण और सैन्य क्षमताओं पर बड़े पैमाने पर निवेश किया है। ऐसे में भारत को भी बदलते युद्ध के स्वरूप के अनुरूप अपनी तैयारियों को मजबूत करना होगा।
कपूर ने विशेष रूप से ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक के बढ़ते महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ITBP अपनी परिचालन क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षण और सीमा पर सुरक्षा ढांचे के विकास पर काम कर रही है।
ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर ITBP का जोर
ITBP प्रमुख के अनुसार, आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। बल की सीमा सुरक्षा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून स्थापित की गई हैं और जवानों को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बल स्वदेशी स्तर पर ड्रोन विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है।
कपूर ने बताया कि ITBP को आधुनिकीकरण के लिए मिले 400 करोड़ रुपये के फंड का लगभग 70 प्रतिशत ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, एक बड़ी आधुनिकीकरण योजना के तहत ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए भी धन आवंटित करने की योजना है।
उन्होंने यह भी कहा कि सीमा पर तैनात जवानों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए भूमिगत संरचनाओं और सुरक्षित ठिकानों के निर्माण पर ध्यान दिया जा रहा है।
अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने की स्थिति
कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कई स्थानों पर आमने-सामने की स्थितियों का उल्लेख किया। उन्होंने इन परिस्थितियों में ITBP की विशेष रूप से प्रशिक्षित शौर्य कमांडो टीमों की भूमिका की सराहना की।
उन्होंने यह भी बताया कि बल ने गलवान जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए ‘स्ट्राइक’ नामक एक नया प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया है। इसका उद्देश्य जवानों को कठिन परिस्थितियों में बेहतर ढंग से कार्य करने के लिए प्रशिक्षित करना है। पूरी फोर्स को इस प्रशिक्षण से जोड़ने का लक्ष्य 2027 के अंत तक रखा गया है।
विदेश मंत्रालय ने 23 अक्टूबर को कहा था कि भारत-चीन सीमा पर स्थिति समय-समय पर तब प्रभावित होती है, जब चीनी सैनिक स्थापित गश्त के तरीकों से अलग गतिविधियां करते हैं। मंत्रालय के अनुसार, दोनों देश वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी तथा तनाव की आशंका कम करने के लिए मौजूदा सैन्य और कूटनीतिक माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं।
गलवान के बाद सीमा सुरक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण
जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा और सैन्य तैयारियां महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं। बदलते युद्ध के स्वरूप और आधुनिक तकनीक के बढ़ते उपयोग ने निगरानी, संचार, प्रशिक्षण तथा जवानों की सुरक्षा को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
ITBP के आधुनिकीकरण से जुड़े कदमों में ड्रोन संचालन, एंटी-ड्रोन प्रणालियां, विशेष कमांडो प्रशिक्षण और सीमा चौकियों पर सुरक्षित बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। इन प्रयासों का उद्देश्य कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में बल की परिचालन क्षमता और जवानों की सुरक्षा को बेहतर बनाना है।
चीन की चुनौती से निपटने की तैयारी कितनी मजबूत?
चीन की सैन्य क्षमताओं में वृद्धि भारत के लिए सीमा सुरक्षा और रणनीतिक तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे में आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित जवान, बेहतर बुनियादी ढांचा और प्रभावी कूटनीति की भूमिका अहम हो जाती है।
ITBP प्रमुख के बयान ने रेखांकित किया है कि सीमा सुरक्षा व्यवस्था को बदलते युद्ध के स्वरूप के अनुरूप लगातार आधुनिक बनाना आवश्यक है। भारत की तैयारियों का आकलन करने के लिए सैन्य संसाधनों, प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमताओं और परिचालन तैयारियों से जुड़े तथ्यों का समग्र अध्ययन जरूरी है।
