Dhanteras 2026: क्यों मनाया जाता है धनतेरस? जानिए भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने की पौराणिक कथा और इस पर्व का धार्मिक महत्व
By: RAJAT MALHHOTRA - ULTRA LUXURY PROPERTY SPECIALIST, NUMEROLOGIST, COLUMNIST
धनतेरस 2026: दीपावली का त्योहार धनतेरस से शुरू होता है। हिंदू धर्म में धनतेरस का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन सोना, चांदी और नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। लेकिन धनतेरस क्यों मनाया जाता है और इसके पीछे कौन-सी पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं? आइए जानते हैं धनतेरस की शुरुआत, समुद्र मंथन की कथा और इस पर्व के धार्मिक महत्व के बारे में।
धनतेरस क्यों मनाया जाता है?
धनतेरस को धनत्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। 'धनतेरस' शब्द 'धन' और 'तेरस' से मिलकर बना है, जिसमें 'तेरस' का अर्थ तेरहवां दिन है।
धनतेरस मनाने के पीछे प्रमुख धार्मिक मान्यता भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य से जुड़ी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को देवताओं का वैद्य और आयुर्वेद से जुड़ा देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा कर लोग अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करते हैं।
क्या है समुद्र मंथन और भगवान धन्वंतरि की पौराणिक कथा?
धनतेरस की प्रमुख पौराणिक कथा समुद्र मंथन से संबंधित है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, एक समय देवताओं की शक्ति कमजोर हो गई थी। इसके बाद भगवान विष्णु की सलाह पर देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया।
समुद्र मंथन के लिए मंदराचल पर्वत को मथानी और नागराज वासुकी को रस्सी बनाया गया। देवताओं और असुरों द्वारा किए गए इस मंथन से कई दिव्य वस्तुएं और रत्न प्रकट हुए।
इसी समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए। अमृत को अमरत्व का प्रतीक माना जाता है। भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है। इसी पौराणिक मान्यता के कारण धनतेरस का दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा से जुड़ा है।
इस कथा के माध्यम से स्वास्थ्य और जीवन की महत्ता पर भी जोर दिया जाता है।
धनतेरस पर क्यों खरीदा जाता है सोना, चांदी और बर्तन?
धनतेरस पर सोना, चांदी, पीतल और नए बर्तन खरीदने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। इसे घर में धन, वैभव और समृद्धि के स्वागत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा भी की जाती है। माता लक्ष्मी को धन, वैभव और सौभाग्य की देवी माना जाता है, जबकि भगवान कुबेर को धन से संबंधित देवता माना जाता है।
हालांकि, सोना या चांदी खरीदना अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है। लोग अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार बर्तन या अन्य उपयोगी वस्तुएं भी खरीदते हैं।
धनतेरस पर क्यों जलाया जाता है यम दीपक?
धनतेरस के दिन यम दीपदान की भी परंपरा है। मान्यता के अनुसार, इस दिन शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर भगवान यम से परिवार की सुख-शांति और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
इसके पीछे राजा हिमा के पुत्र से जुड़ी एक लोकप्रिय पौराणिक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार, राजकुमार की मृत्यु विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से होने की भविष्यवाणी थी। उसकी पत्नी ने मृत्यु को टालने के लिए घर के बाहर दीपक जलाए और सोने-चांदी के आभूषणों का ढेर लगा दिया। रातभर गीत और कहानियों के माध्यम से राजकुमार को जगाए रखा गया। मान्यता है कि यमराज सर्प के रूप में आए, लेकिन दीपकों और आभूषणों की चमक के कारण आगे नहीं बढ़ सके। इस तरह राजकुमार का जीवन बच गया।
इसी मान्यता के आधार पर धनतेरस पर यम दीपक जलाने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।
धनतेरस का धार्मिक और सामाजिक महत्व
धनतेरस केवल सोना-चांदी खरीदने या धन की पूजा तक सीमित नहीं है। इसका धार्मिक महत्व स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की खुशहाली से भी जोड़ा जाता है।
इस दिन घरों की साफ-सफाई की जाती है, दीपक जलाए जाते हैं और पूजा-पाठ किया जाता है। बाजारों में भी विशेष रौनक देखने को मिलती है। यह त्योहार व्यापारियों, कारीगरों, सुनारों और छोटे दुकानदारों के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।
धनतेरस की धार्मिक परंपराएं धन के साथ स्वास्थ्य, परिवार की खुशहाली और मानसिक शांति को महत्व देने का संदेश देती हैं।
निष्कर्ष: धनतेरस का पर्व धन के साथ स्वास्थ्य और खुशहाली को महत्व देने से जुड़ा है। भगवान धन्वंतरि के समुद्र मंथन से जुड़े प्राकट्य की कथा और माता लक्ष्मी की पूजा इस त्योहार के धार्मिक महत्व को दर्शाती है। इसी कारण धनतेरस को दीपावली से जुड़े प्रमुख पर्वों में माना जाता है।
