4 सितंबर को लॉन्च होगा EOS-05, GSLV-F17 से होगा पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का प्रक्षेपण
4 सितंबर को अंतरिक्ष में भारत की नई उड़ान, GSLV-F17 से लॉन्च होगा EOS-05
नई दिल्ली, 3 सितंबर 2026: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 4 सितंबर को एक महत्वपूर्ण पृथ्वी अवलोकन मिशन के लिए GSLV-F17 रॉकेट का प्रक्षेपण करने जा रहा है। ISRO के आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक, EOS-05 उपग्रह को सुबह 2:55 बजे भारतीय समयानुसार लॉन्च किया जाना निर्धारित है। प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकेंड लॉन्च पैड से होगा।
क्या है EOS-05?
EOS-05 एक उन्नत Earth Observation Satellite है। ISRO के अनुसार, यह भारत का पहला imaging satellite है जिसे Geosynchronous Orbit से पृथ्वी की तस्वीरें लेने के लिए तैयार किया गया है। मिशन का प्रमुख उद्देश्य अंतरिक्ष आधारित पृथ्वी अवलोकन के जरिए पृथ्वी से संबंधित चित्र और डेटा उपलब्ध कराना है।
कौन-सा रॉकेट करेगा लॉन्च?
इस मिशन के लिए Geosynchronous Satellite Launch Vehicle यानी GSLV-F17 का इस्तेमाल किया जाएगा। ISRO के मुताबिक, यह GSLV की 19वीं उड़ान है। रॉकेट EOS-05 को Sub-Geosynchronous Transfer Orbit यानी Sub-GTO में स्थापित करेगा। GSLV तीन चरणों वाला प्रक्षेपण यान है, जिसमें क्रायोजेनिक अपर स्टेज का इस्तेमाल किया जाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है मिशन?
पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों से प्राप्त डेटा का इस्तेमाल कृषि, जल संसाधन, शहरी नियोजन, पर्यावरण, वानिकी और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। ISRO के अनुसार, भारत के Earth Observation satellites से मिलने वाले आंकड़े विभिन्न राष्ट्रीय और वैश्विक उपयोगों के लिए काम आते हैं।
EOS-05 के मामले में वास्तविक प्रदर्शन और मिशन की सफलता का आकलन प्रक्षेपण तथा उपग्रह के निर्धारित कक्षा में स्थापित होने के बाद ही किया जा सकेगा। फिलहाल ISRO ने इसे 4 सितंबर के लिए निर्धारित मिशन के रूप में सूचीबद्ध किया है।
कब और कहां होगा प्रक्षेपण?
प्रक्षेपण 4 सितंबर 2026 को सुबह 2:55 बजे IST पर श्रीहरिकोटा के सेकेंड लॉन्च पैड से निर्धारित है। ISRO ने मिशन की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए आधिकारिक पेज भी उपलब्ध कराया है।
EOS-05 मिशन भारत की पृथ्वी अवलोकन क्षमताओं में एक और संभावित विस्तार को दर्शाता है। हालांकि, मिशन के अंतिम परिणाम और उपग्रह के प्रदर्शन की पुष्टि प्रक्षेपण के बाद ही की जा सकेगी।