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फिल्म समीक्षा: मिर्जापुर द मूवी अखबार के लिए विशेष समीक्षा

By AMIT KUMAR SINGH • 2026-09-05 06:40 • 5 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
फिल्म समीक्षा: मिर्जापुर द मूवी अखबार के लिए विशेष समीक्षा

फिल्म: मिर्जापुर: द मूवी
निर्देशक: गुरमीत सिंह
कलाकार: पंकज त्रिपाठी, अली फज़ल, दिव्येंदु, रवि किशन, जितेंद्र कुमार, रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी
स्टार रेटिंग: 3.5 / 5

बड़े पर्दे पर वही पुराना भौकाल, लेकिन लंबी अवधि बनी रोड़ा:
अमेज़न प्राइम वीडियो की सबसे लोकप्रिय वेब सीरीज़ 'मिर्जापुर' ने अपने देसी स्वैग, मारधाड़ और किरदारों के तीखे तेवरों से दर्शकों के दिलों पर सालों तक राज किया है। अब मेकर्स इसी भौकाल को ओटीटी के छोटे पर्दे से निकालकर सिनेमाघरों के बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। निर्देशक गुरमीत सिंह की 'मिर्जापुर द मूवी' आज बड़े पर्दे पर दस्तक दे चुकी है।

क्या है फिल्म की कहानी?
वेब सीरीज़ के अगले सीजन का इंतजार कर रहे फैंस के लिए मेकर्स ने एक अलग प्रयोग किया है। सीरीज़ की कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय, इन्हीं किरदारों को लेकर एक बिल्कुल नई और समानांतर कहानी बुनी गई है।

मिर्जापुर की गद्दी पर अखंडानंद त्रिपाठी उर्फ कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) का राज है, लेकिन इस गद्दी को हथियाने की होड़ जौनपुर से लेकर जैसलमेर तक फैली है। इस बार कहानी में सबसे बड़ा मोड़ बनकर आते हैं बब्बन यादव (रवि किशन)। बब्बन एक शातिर चाल के तहत गुड्डू पंडित (अली फज़ल) और बबलू पंडित (जितेंद्र कुमार) का इस्तेमाल कर कालीन भैया को मिर्जापुर से बाहर खींचने और खत्म करने की साज़िश रचता है। सत्ता, विश्वासघात और वर्चस्व की इस जंग में मुन्ना भैया (दिव्येंदु) का स्वैग और बीना त्रिपाठी (रसिका दुग्गल) की चालें कहानी को और उलझा देती हैं।

अभिनय और किरदार: रवि किशन बने सरप्राइज पैकेज

-रवि किशन: फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी रवि किशन का किरदार है। बब्बन यादव के रूप में उनका खतरनाक और देसी अंदाज़ दर्शकों को खूब पसंद आता है।
-पंकज त्रिपाठी & दिव्येंदु: कालीन भैया के रूप में पंकज त्रिपाठी का ठहराव और रौब स्क्रीन पर कमाल लगता है। वहीं, मुन्ना भैया के रूप में दिव्येंदु की वापसी फैंस के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं है।
-अली फज़ल & जितेंद्र कुमार: गुड्डू पंडित के रूप में अली फज़ल का एग्रेसिव लुक सिनेमाई स्क्रीन पर जचता है। बबलू पंडित के रोल में जितेंद्र कुमार ने भी अपने हिस्से की जिम्मेदारी बखूबी निभाई है।

तकनीकी पक्ष और निर्देशन:
फिल्म का स्केल वेब सीरीज़ के मुकाबले काफी बड़ा और भव्य है। जैसलमेर के रेगिस्तान में फिल्माए गए एक्शन सीन्स और थिएटर का भारी-भरकम बैकग्राउंड स्कोर माहौल में तनाव और थ्रिल बनाए रखता है। संवादों में वही मिर्जापुर वाला एटीट्यूड और तीखा देसीपन कायम है।

कहाँ कमजोर पड़ी फिल्म?
1) अत्यधिक लंबाई: फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी 3 घंटे 15 मिनट से ज्यादा की अवधि है।

2) धीमी शुरुआत: पहला हाफ किरदारों को स्थापित करने में काफी वक्त लेता है, जिससे कहानी कई जगह खिंची हुई और बोरिंग महसूस होती है।

3) बेतुके गाने: क्राइम-थ्रिलर के बीच जबरदस्ती डाले गए गाने फिल्म की रफ्तार को तोड़ते हैं।

अंतिम फैसला:
यदि आप 'मिर्जापुर' सीरीज़ के पक्के फैन हैं और अपने पसंदीदा किरदारों (खासकर मुन्ना भैया और कालीन भैया) को थिएटर के बड़े पर्दे पर बड़े स्केल में देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक बार देखने लायक (One Time Watch) अनुभव है।

देखें या नहीं: फैंस के लिए पैसा वसूल, लेकिन जो लोग तेज रफ्तार क्राइम थ्रिलर पसंद करते हैं, उन्हें इसकी लंबाई थोड़ा थका सकती है।

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