LATEST NEWS

गया सिविल कोर्ट के बाहर वकीलों का उबाल — हाईकोर्ट से आवंटित ज़मीन पर निर्माण रुकवाने के आरोप में सड़क जाम, पुलिस की ‘बिना लिखित आदेश’ कार्रवाई पर सवाल,

By VIJAY KUMAR • 2026-09-21 06:02 • 4 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
गया सिविल कोर्ट के बाहर वकीलों का उबाल — हाईकोर्ट से आवंटित ज़मीन पर निर्माण रुकवाने के आरोप में सड़क जाम, पुलिस की ‘बिना लिखित आदेश’ कार्रवाई पर सवाल,

गया सिविल कोर्ट के बाहर वकीलों का उबाल — हाईकोर्ट से आवंटित ज़मीन पर निर्माण रुकवाने के आरोप में सड़क जाम, पुलिस की ‘बिना लिखित आदेश’ कार्रवाई पर सवाल,

विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार,
19 सितम्बर 2026,
गयाजी : गया शहर के सिविल कोर्ट परिसर के बाहर शनिवार शाम उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब जिला प्रशासन द्वारा अधिवक्ताओं को आवंटित भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को पुलिस ने कथित तौर पर रुकवा दिया।
इसके विरोध में गया बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने सिविल कोर्ट के बाहर सड़क जाम कर दी। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया, जिससे राहगीरों व वाहन चालकों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी।
प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराने और प्रशासन से स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

क्या है विवाद की जड़ :
निर्माण कार्य करा रहे अधिवक्ता शशि भूषण मालवीय के अनुसार, उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने अधिवक्ताओं के लिए भूमि आवंटित की थी, जिस पर निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका था।

इसी दौरान सिविल लाइन थाने के एक दरोगा मौके पर पहुंचे और काम बंद कराने को कहा।
मालवीय का कहना है कि उन्होंने अधिकारी से अनुरोध किया कि यदि आपत्ति है तो जिला प्रशासन के संबंधित अधिकारी से बात कर ली जाए, और आवंटन-पत्र भी उनके पास मौजूद होने की बात कही — इसके बावजूद काम बंद कराने का दबाव बनाया गया।

“ लिखित आदेश दीजिए, हम काम बंद कर देंगे — गया बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं की पुलिस से सीधी मांग। ”
गया बार एसोसिएशन के सचिव रविंद्र प्रसाद के अनुसार, मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी से स्पष्ट कहा गया कि यदि निर्माण रोकने का आदेश है तो उसे लिखित रूप में दिया जाए, जिसके बाद वे स्वयं काम बंद कर देंगे।
परंतु कथित तौर पर कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया, फिर भी निर्माण कार्य रुकवा दिया गया।

अधिवक्ताओं का यह भी आरोप है कि इस दौरान उन्हें एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने की चेतावनी भी दी गई — एक ऐसा आरोप, जो अत्यंत गंभीर है और स्वतंत्र जांच की मांग करता है।

अधिवक्ताओं की मांग :
मालवीय ने जिला प्रशासन के वरीय अधिकारियों से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जमीन आवंटन से जुड़े सभी दस्तावेज़ प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे, परंतु यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि निर्माण कार्य रोकने का आदेश किस स्तर से जारी हुआ और पुलिस को किस आधार पर मौके पर भेजा गया। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विवाद का समाधान बातचीत और प्रशासनिक स्तर पर होना चाहिए, न कि बिना लिखित आदेश के मनमाने ढंग से निर्माण कार्य रुकवाकर।

सवाल :
1. यदि भूमि वाकई हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रशासन द्वारा अधिवक्ताओं को विधिवत आवंटित की गई थी, तो पुलिस ने बिना लिखित आदेश के निर्माण कार्य रुकवाने का दुस्साहस किस आधार पर किया?
2. यदि आवंटन को लेकर कोई प्रशासनिक आपत्ति थी, तो सीधे मौके पर पुलिस भेजने के बजाय संबंधित विभागीय अधिकारी के माध्यम से लिखित सूचना क्यों नहीं दी गई?
3. एससी-एसटी एक्ट जैसे गंभीर कानून के तहत मामला दर्ज कराने की चेतावनी किस आधार पर और किसके निर्देश पर दी गई — क्या यह सामान्य विवाद को डराने-धमकाने का औजार बनाया जा रहा था?
4. न्यायपालिका से जुड़े अधिवक्ता समुदाय को ही यदि प्रशासनिक मनमानी का सामना करना पड़े, तो आम नागरिक की स्थिति का अंदाज़ा सहज लगाया जा सकता है।
5. घंटों तक सिविल कोर्ट के बाहर यातायात ठप रहने से आम राहगीरों को जो परेशानी झेलनी पड़ी, उसकी जिम्मेदारी किस पर तय होगी — निर्माण रुकवाने वाले अधिकारी की, या समय रहते हस्तक्षेप न करने वाले वरीय प्रशासन की?

मांगें :
1. जिला प्रशासन तत्काल इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए और स्पष्ट करे कि भूमि आवंटन वैध था या नहीं, तथा निर्माण रोकने का आदेश किस स्तर से जारी हुआ।
2. संबंधित दरोगा द्वारा बिना लिखित आदेश के कार्रवाई करने और SC-ST एक्ट में केस दर्ज कराने की कथित धमकी देने के आरोप की विभागीय जांच हो, और तथ्य सही पाए जाने पर उचित कार्रवाई हो।
3. प्रशासन शीघ्र ही आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करे, ताकि अफवाहों व एकपक्षीय आरोप-प्रत्यारोप की गुंजाइश समाप्त हो।
4. भविष्य में किसी भी भूमि-विवाद में निर्माण रुकवाने से पहले संबंधित पक्ष को लिखित सूचना देने की अनिवार्य प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए, ताकि इस तरह की सड़क-जाम जैसी स्थिति दोबारा न बने।
5. पुलिस-प्रशासन गया सिविल कोर्ट परिसर के आसपास यातायात बाधित होने की स्थिति में आम नागरिकों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्ग व त्वरित समाधान तंत्र विकसित करे।

टिप्पणी :
गया सिविल कोर्ट के बाहर हुआ यह घटनाक्रम केवल एक भूमि-विवाद भर नहीं है — यह प्रशासनिक पारदर्शिता और पुलिस की जवाबदेही से जुड़ा सवाल है। जब खुद न्याय-व्यवस्था से जुड़े अधिवक्ता समुदाय को बिना लिखित आदेश के प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़े, तो यह चिंता का विषय बनता है।

प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द-से-जल्द अपना आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक करे, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

VIJAY KUMAR 0 followers