पूर्व मुख्यमंत्री की जमीन ही सुरक्षित नहीं!
कमलनाथ की जमीन से जुड़े विरासत आवेदन पर विवाद, कथित फर्जी वसीयत की जांच
बिजनौर जिले की नजीबाबाद तहसील क्षेत्र में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से जुड़ी जमीन की विरासत दर्ज कराने के आवेदन को लेकर विवाद सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके प्रतिनिधि की ओर से तहसील में विरासत दर्ज कराने के लिए आवेदन किया गया था, जो करीब पांच महीने तक लंबित रहा। इसी दौरान जमीन को लेकर कथित वसीयत, कब्जे और दस्तावेजों में हेरफेर के आरोप सामने आए।
मामले में कमलनाथ के पिता महेंद्रनाथ की जमीन से संबंधित विरासत और वर्ष 1998 में तैयार बताई गई वसीयत का भी उल्लेख किया गया है। आरोपित पक्ष की ओर से प्रस्तुत की गई वसीयत को लेकर विवाद सामने आने के बाद दस्तावेजों की जांच किए जाने की बात कही गई है। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है।
मामले में लेखपाल की रिपोर्ट और राजस्व प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, दस्तावेजों की वैधता, जमीन के स्वामित्व और कब्जे से जुड़े आरोपों की अंतिम स्थिति जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
भूमि विवाद से जुड़े मामले में भूमि माफिया और राजस्व कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। जिलाधिकारी स्तर से मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
यह मामला विरासत दर्ज कराने की प्रक्रिया, राजस्व रिकॉर्ड और भूमि विवादों में प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े सवालों को भी सामने लाता है। आवेदन के लंबित रहने की अवधि और संबंधित राजस्व प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट की जानी आवश्यक है।