कुलदेवी माता मंदिर कोसली का नाम दोबारा ‘भिमेश्वरी’ बोर्ड लगाने से विवाद, सरपंच पर मनमानी के आरोप; कोसलिया गौत्र के श्रद्धालुओं में रोष
कोसली मंदिर के नाम को लेकर विवाद, चढ़ावे के हिसाब की जांच की मांग
कोसली, रेवाड़ी, हरियाणा: कोसली स्थित कुलदेवी माता मंदिर के नाम वाले बोर्ड पर दोबारा ‘भिमेश्वरी’ लिखे जाने को लेकर विवाद सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, सरपंच रामकिशन जांगड़ा द्वारा मंदिर पर यह नाम लिखे जाने के बाद कुछ श्रद्धालुओं ने आपत्ति जताई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मंदिर के नाम का निर्धारण पारंपरिक आस्था और उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों के आधार पर किया जाना चाहिए।
मंदिर के नाम को लेकर आपत्ति
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि बोर्ड पर नाम दोबारा लिखे जाने से कोसलिया गौत्र के कुछ श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कुलदेवी माता कोसली और कुलगुरु बाबा मुक्तेश्वरपुरी महाराज से जुड़ी परंपराओं का उल्लेख करते हुए मामले के समाधान की मांग की है। मंदिर के नाम और उससे जुड़ी परंपराओं की पुष्टि के लिए पुराने अभिलेखों तथा संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
चढ़ावे के हिसाब-किताब पर सवाल
शिकायतकर्ताओं ने नवरात्र मेले के दौरान मंदिर की रसीद बुक के इस्तेमाल और चढ़ावे की राशि के हिसाब-किताब को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि आय और खर्च का विवरण पर्याप्त रूप से पारदर्शी नहीं है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, मठ कमेटी/ट्रस्ट के पूर्व अकाउंटेंट नरेंद्र सिंह की एक वीडियो में मठ की व्यवस्था और खर्चों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। वीडियो की प्रामाणिकता, तारीख और पूरे संदर्भ की पुष्टि किए बिना इसमें कही गई बातों को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने सरपंच और मठ के प्रशासक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए चढ़ावे की राशि की गिनती, आय-व्यय के रिकॉर्ड और प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि धन की गिनती के दौरान गांव के गणमान्य व्यक्तियों, लंबरदारों और पंचायत प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया। इस दावे की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और अन्य पक्षों के बयान से की जानी चाहिए।
शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कोसली के उपमंडल अधिकारी (SDM) को कई बार लिखित शिकायतें और दस्तावेज दिए हैं। शिकायतों की प्राप्ति तथा प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई की पुष्टि होना बाकी है।
मंदिर के नाम को लेकर जारी विवाद के समाधान के लिए संबंधित पक्षों के बीच संवाद, उपलब्ध अभिलेखों की जांच और चढ़ावे के आय-व्यय का पारदर्शी विवरण महत्वपूर्ण होगा। प्रकाशन से पहले सरपंच, मठ कमेटी/ट्रस्ट और संबंधित प्रशासन का पक्ष शामिल किया जाना चाहिए, ताकि पाठकों के सामने मामले की संतुलित तस्वीर प्रस्तुत हो सके।