नोएडा और गाजियाबाद की वायु गुणवत्ता रैंकिंग में सुधार, लेकिन स्वच्छ हवा अभी भी दूर
नोएडा और गाजियाबाद की वायु गुणवत्ता रैंकिंग में सुधार, लेकिन स्वच्छ हवा अभी भी दूर
नोएडा/गाजियाबाद | इंडियन प्रेस यूनियन
नोएडा और गाजियाबाद ने वायु प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। हालांकि, बेहतर रैंकिंग के बावजूद दोनों शहरों के निवासियों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ हवा की चुनौती अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के नवीनतम संस्करण में नोएडा ने अपनी श्रेणी में बेहतर प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर **आठवां स्थान** प्राप्त किया है। वहीं, गाजियाबाद ने भी अपनी स्थिति में सुधार करते हुए नौवां स्थान हासिल किया है।
यह सर्वेक्षण केवल किसी शहर के दैनिक एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर आधारित नहीं है, बल्कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नगर प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा किए जा रहे प्रयासों का व्यापक मूल्यांकन करता है।
नोएडा का लगातार बेहतर प्रदर्शन
3 से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में नोएडा ने 200 में से 187.5 अंक हासिल किए। शहर ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी रैंकिंग में लगातार सुधार किया है।
वर्ष 2022 में सर्वेक्षण की शुरुआत के दौरान नोएडा रैंकिंग सूची में शामिल नहीं था। इसके बाद शहर ने 2023 में 24वां स्थान, 2024 में छठा स्थान और 2025 में नौवां स्थान प्राप्त किया था। नवीनतम सर्वेक्षण में नोएडा ने आठवें स्थान पर पहुंचकर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
प्रशासन द्वारा सड़क की धूल नियंत्रित करने, मैकेनिकल स्वीपिंग, पानी के छिड़काव, निर्माण स्थलों की निगरानी, हरित क्षेत्र बढ़ाने और इलेक्ट्रिक बसों सहित स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कदमों को इस सुधार का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि रैंकिंग में सुधार के बावजूद सर्दियों के दौरान नोएडा में प्रदूषण का स्तर गंभीर चिंता का विषय बना रहता है। सड़क की धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं और प्रतिकूल मौसमीय परिस्थितियां मिलकर कई बार वायु गुणवत्ता को खराब कर देती हैं।
## गाजियाबाद भी राष्ट्रीय टॉप-10 में
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में गाजियाबाद ने 200 में से 184 अंक प्राप्त करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर नौवां स्थान हासिल किया है। पिछले वर्ष गाजियाबाद 12वें स्थान पर था, जिससे इस वर्ष शहर ने तीन स्थानों की छलांग लगाई है।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी गाजियाबाद की स्थिति बेहतर हुई है और राज्य स्तर पर यह लखनऊ और आगरा के बाद तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
सड़क की धूल, ठोस कचरा प्रबंधन, निर्माण एवं ध्वस्तीकरण से उत्पन्न मलबे के बेहतर प्रबंधन तथा वाहनों और औद्योगिक इकाइयों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के प्रयासों को इस सुधार में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लोनी क्षेत्र अभी भी गंभीर चुनौती
हालांकि गाजियाबाद की समग्र रैंकिंग में सुधार हुआ है, लेकिन शहर के कुछ क्षेत्र अब भी गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। विशेष रूप से लोनी क्षेत्र वायु प्रदूषण के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हाल के अध्ययनों और स्थानीय आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि लोनी में पार्टिकुलेट मैटर का स्तर गाजियाबाद के कई अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक रहा है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल शहर की समग्र रैंकिंग में सुधार पर्याप्त नहीं है। प्रदूषण के हॉटस्पॉट क्षेत्रों के लिए विशेष और लक्षित कार्ययोजना की आवश्यकता है।
बेहतर रैंकिंग का अर्थ हमेशा स्वच्छ हवा नहीं
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग यह दर्शाती है कि नोएडा और गाजियाबाद ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए अपनी व्यवस्थाओं और प्रयासों को मजबूत किया है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि दोनों शहरों में हर दिन की हवा पूरी तरह स्वच्छ और स्वास्थ्य के अनुकूल हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब रैंकिंग में सुधार के साथ-साथ प्रदूषण के स्तर में भी स्थायी और स्पष्ट कमी दिखाई दे।
तेजी से विकसित हो रहे नोएडा और गाजियाबाद के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक प्रयासों और बेहतर रैंकिंग को आम नागरिकों के लिए वास्तविक स्वच्छ हवा में बदलना है।
इसके लिए निर्माण गतिविधियों की कड़ी निगरानी, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण, सड़क की धूल का प्रभावी प्रबंधन, औद्योगिक प्रदूषण पर सख्त कार्रवाई, कचरा प्रबंधन में सुधार और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक होगी।
नोएडा और गाजियाबाद ने स्वच्छ हवा की दिशा में अपनी रैंकिंग जरूर सुधारी है, लेकिन लाखों नागरिकों के लिए असली सफलता तब होगी, जब बेहतर आंकड़ों के साथ हर दिन सांस लेने योग्य स्वच्छ और स्वस्थ हवा भी सुनिश्चित हो सके।
— इंडियन प्रेस यूनियन