आस्था, कला और आधुनिकता का महासंगम: शेरघाटी में जीवंत होती लोक-संस्कृति,
शेरघाटी में दुर्गा पूजा पंडालों में दिखी स्थापत्य कला और ग्रामीण संस्कृति की झलक
शेरघाटी, गया | 18 अक्टूबर 2026: बिहार के गया जिले के शेरघाटी में दुर्गा पूजा के अवसर पर विभिन्न मोहल्लों में सजाए गए पंडालों में स्थापत्य कला, स्थानीय परंपराओं और ग्रामीण जीवन से जुड़े विषयों को प्रदर्शित किया गया। इन पंडालों के माध्यम से धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक विविधता को भी प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।
पंडालों में अलग-अलग स्थापत्य शैलियों का चित्रण
गोला बाजार और लीपगंज चट्टी में दक्षिण भारतीय मंदिरों तथा तिरुपति शैली से प्रेरित संरचनाएं तैयार किए जाने की जानकारी है। वहीं, हटिया मोहल्ले में बौद्ध मंदिर की वास्तुकला से प्रेरित सजावट की गई। इन प्रस्तुतियों में विभिन्न क्षेत्रों की स्थापत्य परंपराओं को स्थानीय स्तर पर दर्शाने का प्रयास किया गया है।
ग्रामीण जीवन और परंपराओं की झांकी
हटिया मोहल्ले की ग्रामीण जीवन पर आधारित झांकी में खेतों, खलिहानों, किसानों और पोखरों से जुड़े दृश्यों को शामिल किया गया। इस प्रकार की प्रस्तुतियां कृषि जीवन और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाती हैं।
ग्रामीण परिवेश पर आधारित सजावट के माध्यम से नई पीढ़ी को पारंपरिक जीवनशैली और कृषि से जुड़ी गतिविधियों से परिचित कराने का प्रयास किया गया।
स्थानीय कारीगरों की भागीदारी और सुरक्षा व्यवस्था
आयोजनों से जुड़े विवरण के अनुसार, कुछ पूजा पंडालों का बजट सात से दस लाख रुपये के बीच बताया गया है। इन तैयारियों में स्थानीय मूर्तिकारों और कारीगरों की भागीदारी की जानकारी भी सामने आई है। बजट और कारीगरों की भागीदारी के संबंध में आयोजन समितियों से पुष्टि की जानी चाहिए।
आयोजकों के अनुसार, पंडालों में CCTV निगरानी, अग्निशामक यंत्रों, महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश मार्गों तथा पेयजल की व्यवस्था की गई है। इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित आयोजन समितियों से की जानी चाहिए।
आस्था और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति
शेरघाटी के दुर्गा पूजा आयोजन धार्मिक आस्था के साथ कला, स्थानीय परंपराओं और सामुदायिक भागीदारी को भी स्थान देते हैं। विभिन्न विषयों पर आधारित पंडाल स्थानीय संस्कृति और रचनात्मकता को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करने का माध्यम बनते हैं।