टेंगनमाड़ा -पेंड्रारोड रेलवे मार्ग पर ऑटो सिग्नलिंग की तैयारी 59.82 करोड़ की लागत से आधुनिकीकरण
टेंगनमाड़ा -पेंड्रारोड रूट पर ऑटो सिग्नलिंग की तैयारी, अब ट्रैक खाली होते ही बदलेंगे सिग्नल
59.82 करोड़ से लगेगा आधुनिक सिस्टम, ट्रेनों को अधिक व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित करने की बढ़ेगी क्षमता, मौजूदा पैनल इंटरलॉकिंग में होगा बदलाव
बिलासपुर से पेंड्रारोड, अनूपपुर और कटनी की ओर जाने वाले रेलखंड पर अब ट्रेनों की आवाजाही को पहले से ज्यादा बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा। रेलवे 59.82 करोड़ रुपए खर्च कर टेंगनमड़ा-खोंगसरा-भनवारटंक-खोड़री-सारबहरा-पेंड्रारोड के बीच सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक करने जा रहा है।
नया सिस्टम कैसे काम करेगा: इस नए सिस्टम में एमएसडीसी (MSDC) लगातार यह बताएगा कि ट्रेन किस हिस्से में है और आगे का ट्रैक खाली है या नहीं। ट्रैक की स्थिति बताते ही, जैसे ही ट्रेन आगे निकलेगी, सिस्टम को पता चल जाएगा और पीछे आने वाली ट्रेन के लिए सिग्नल बदल जाएगा।
फायदे: इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दो ट्रेनों के बीच सुरक्षित अंतर (हेडवे) कम होगा। इससे ट्रेनों को लंबी देर तक रोकना नहीं पड़ेगा और उसी समय में ज्यादा ट्रेनें इस रेलखंड से गुजर सकेंगी।
तकनीक: यहाँ ऑटोमैटिक सिग्नलिंग और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के साथ एमएसडीसी, ओएफसी (OFC), आईपीएस (IPS) और नया इंडोर-आउटडोर सिग्नलिंग सिस्टम लगाया जाएगा।