State News

"नश्वर देह का त्याग और शाश्वत प्रकाश: पूज्य बड़े बाबूजी की अंतिम यात्रा एवं आध्यात्मिक विरासत"

By VIJAY KUMAR • 2026-08-29 12:03 • 11 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
"नश्वर देह का त्याग और शाश्वत प्रकाश: पूज्य बड़े बाबूजी की अंतिम यात्रा एवं आध्यात्मिक विरासत"

"नश्वर देह का त्याग और शाश्वत प्रकाश: पूज्य बड़े बाबूजी की अंतिम यात्रा एवं आध्यात्मिक विरासत"
आध्यात्मिक चेतना के एक स्वर्णिम युग का विराम:

विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

गयाजी : 28 अगस्त 2026 की रात्रि का अंतिम प्रहर भारतीय गृहस्थ योग साधना और रामाश्रम सत्संग परिवार के लिए एक अत्यंत कष्टदयी व अपूरणीय क्षति लेकर आया।

टूंडला सत्संग धाम के मुख्य आधार स्तंभ, परम पूज्य 'बड़े बाबूजी' (श्री प्रभु दयाल शर्मा जी) अपने नश्वर शरीर का त्याग कर 2:40 बजे रात्रि गुरुलोक प्रस्थान कर गए।

उनके शांत और अलौकिक महाप्रयाण की सूचना से देश-विदेश में फैले लाखों साधक भाइयों और बहनों के हृदय गहरे शोक में डूब गए हैं।

सरलता, वात्सल्य और सहज योग का जीवंत रूप:

पंडित मिही लाल जी की आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पूज्य बड़े बाबूजी ने अपने भ्राता पूज्य कृष्ण कांत जी के साथ दशकों तक महात्मा रामचंद्र जी (लालाजी महाराज) एवं डॉ. चतुर्भुज सहाय जी (गुरु महाराज) के सहज मार्ग का प्रचार-प्रसार किया।

उन्होंने यह सिद्ध करके दिखाया कि गृहस्थ जीवन के दैनिक दायित्वों को निभाते हुए भी ईश्वर की प्राप्ति और आंतरिक शांति संभव है। उनकी सौम्य वाणी, चेहरे की अलौकिक शांति और हर साधक को पिता तुल्य स्नेह देने की शैली ने अनगिनत लोगों को आध्यात्मिक राह दिखाई।

संयम, साधना और मौन का संदेश:

बड़े बाबूजी के गुरुधाम सिद्धारने के उपरांत सितंबर 2026 के सभी कार्यक्रमों—चाहे वह टूंडला का ऐतिहासिक भंडारा हो या मथुरा में आयोजित होने वाला पूज्य मंझले भैया जी का अवतरण पर्व—को निरस्त करने का निर्णय संत परंपरा के प्रति अगाध निष्ठा और आदर को दर्शाता है।

यह निरस्तीकरण केवल आयोजनों का विराम नहीं है, बल्कि हर साधक के लिए अपने भीतर उतरकर गुरु-मंत्र और गुरु-स्वरूप का गहराई से ध्यान करने का मौन आह्वान है।

श्रद्धांजलि एवं प्रार्थना:

परम पूज्य बड़े बाबूजी की देह भले ही शांत हो गई हो, परंतु उनके उपदेश, उनकी सरलता और उनका आशीर्वाद सदैव साधक समाज का मार्गदर्शन करता रहेगा।

हम परम पूज्य गुरु महाराज के श्रीचरणों में अश्रुपूरित प्रार्थना करते हैं कि वे समस्त साधक परिवार को इस असहनीय एवं असीम दुख को सहन करने की आत्मिक शक्ति प्रदान करें।

॥ ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ॥

#आध्यात्मिक चेतना के एक स्वर्णिम युग का विराम:
VIJAY KUMAR 0 followers