मदुरै के तिरुपरमकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित सिकंदर बादशाह दरगाह के पास मौजूद ‘दीपस्तंभ’ को लेकर चल रहे विवाद में तमिलनाडु हिंदू धर्मार्थ बंदोबस्ती बोर्ड (TNHR & CE) ने उच्च न्यायालय को सूचित किया है कि यह संरचना मंदिर का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक प्राचीन जैन निर्माण हो सकती है। बोर्ड ने ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों का हवाला देते हुए यह स्पष्टीकरण दिया, जिसके अनुसार इस क्षेत्र में जैन तीर्थंकरों की मूर्तियों और जैन ठिकानों की उपस्थिति दर्ज है। यह स्पष्टीकरण, कट्टर हिंदू संगठनों को दीपस्तंभ पर कार्तिक दीप जलाने की अनुमति देने वाली सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान दिया गया। मंदिर प्रबंधन ने भी इस बात पर जोर दिया कि वास्तविक दीपस्तंभ उचिप्पिल्लायार मंदिर में है और दरगाह के पास दीप जलाने की कोई पारंपरिक प्रथा या दस्तावेजी प्रमाण नहीं है। इस तरह, बोर्ड के खुलासे से इस संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है।

 

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