युवा शक्ति के प्रतीक, दूरदर्शी नेता, आधुनिक भारत के शिल्पकार,राजीव गांधी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री की पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि।राष्ट्रीय आतकवाद विरोधी दिवस आतंक के खिलाफ़ एकजुट भारत, सुरक्षित भारत, समृद्ध भारत !
युवा शक्ति के प्रतीक, दूरदर्शी नेता, आधुनिक भारत के शिल्पकार,राजीव गांधी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री की पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि।राष्ट्रीय आतकवाद विरोधी दिवस आतंक के खिलाफ़ एकजुट भारत, सुरक्षित भारत, समृद्ध भारत !
1984 के आम चुनावों में कांग्रेस ने रिकॉर्ड 414 सीटें जीतीं थी।
यह राजीव गांधी की चरम पॉपुलैरिटी और पॉवर का दौर था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने और दिसंबर 1984 के चुनाव में कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया। कुल 414 सीटें, जो भारतीय चुनावी इतिहास में किसी भी पार्टी का अब तक का सबसे बड़ा बहुमत है।
यह दौर उनके “मॉडर्न इंडिया” के विजन की शुरुआत भी था, जिसने उन्हें युवा, ईमानदार और प्रगतिशील नेता के रूप में स्थापित किया।
इंदिरा गांधी की हत्या के ठीक बाद हुए इन चुनावों में राजीव ने पूरे देश का दौरा किया, सैकड़ों रैलियां कीं और कांग्रेस को अभूतपूर्व जीत दिलाई। राजीव गांधी के प्रधानमंत्री काल का सबसे प्रमुख कार्य था सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर और टेलीकॉम क्रांति की नींव रखना।
वे भारत के कंप्यूटर और संचार क्रांति के जनक माने जाते हैं। उन्होंने समानांतर रूप से कई टेक्नोलॉजी मिशन शुरू किए और सैम पित्रोदा जैसे विशेषज्ञों को साथ लेकर देश को आधुनिक बनाने का मिशन शुरू किया।
पहले टेलीफोन अमीरों की चीज थी, राजीव के प्रयासों से यह आम लोगों, खासकर ग्रामीण भारत तक पहुंचा। इससे व्यवसाय, सरकारी कामकाज और सूचना का आदान-प्रदान आसान हुआ, जो बाद में भारत की IT और BPO इंडस्ट्री (Infosys, Wipro जैसी कंपनियों) की मजबूत नींव बना। आज का डिजिटल इंडिया इसी की देन है।
1984 में राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की दूरसंचार क्रांति की नींव पड़ी। उस समय भारत में मात्र 20-25 लाख टेलीफोन थे, जो मुख्यतः शहरों तक सीमित थे। टेलीफोन लगवाना बहुत मुश्किल और महंगा था, ग्रामीण क्षेत्र लगभग इससे कटे हुए थे।
दूरसंचार क्रांति में सैम पित्रोदा का आगमन बहुत महत्वपूर्ण था। वे अमेरिका में सफल टेलीकॉम इंजीनियर थे। 1981 में भारत आने पर उन्होंने देश की खराब टेलीकॉम व्यवस्था देखी और बदलाव की ठान ली। इंदिरा गांधी के समय संपर्क हुआ, लेकिन राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर 1984 में पित्रोदा को सलाहकार बनाया गया।
अगस्त 1984 में देश में C-DOT (Centre for Development of Telematics) की स्थापना की गई। यह स्वायत्त संस्था थी, जिसका उद्देश्य भारत में स्वदेशी डिजिटल टेलीफोन एक्सचेंज विकसित करना था। पित्रोदा इसके संस्थापक और पहले प्रमुख बने। C-DOT ने विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम की और भारतीय परिस्थितियों जैसे गर्मी, धूल, बिजली की समस्या के अनुकूल सस्ती तकनीक बनाई।
देश में छोटे-बड़े डिजिटल एक्सचेंज विकसित किए गए (Rural Automatic Exchanges – RAX)। इनसे गांवों में भी टेलीफोन एक्सचेंज लगाए गए। C-DOT ने भारत को स्वावलंबी बनाया।
दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में टेलीफोन सेवाएं सुधारने के लिए अलग कंपनी महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) की स्थापना की गयी। इससे सेवाएं तेज और कुशल हुईं।
अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार के लिए विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL)की स्थापना की गयी। इससे विदेशी संपर्क आसान हुआ।
इस दौर में सब्सक्राइबर ट्रंक डायलिंग (STD) और पब्लिक काल ऑफिसेज (PCO) बूथों का भारी विस्तार किया गया। गांव-गांव में PCO बूथ खोले गए, जहां आम आदमी सस्ते में STD कॉल कर सकता था। यह सबसे दृश्यमान बदलाव था जो ग्रामीण भारत को बाहरी दुनिया से जोड़ने वाली कड़ी बनी।
राजीव गांधी ने 1989 में टेलीकॉम कमीशन बनाया, जिसमें स्वायत्तता दी गई। इससे नीतियां तेजी से लागू हो सकीं। कंप्यूटर आयात पर ड्यूटी कम की गई। टेक्नोलॉजी मिशन शुरू किए गए।
सरकारी विभागों में कंप्यूटराइजेशन की शुरुआत हुई।
इसके परिणाम स्वरूप टेलीफोन कनेक्शन्स में तेज वृद्धि हुई।ग्रामीण क्षेत्रों में संचार सुविधा बढ़ी इससे व्यवसाय, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि में मदद मिली। बाद में IT और BPO इंडस्ट्री की मजबूत नींव पड़ी। आज का डिजिटल इंडिया क्रांति इसी की देन है।
यह क्रांति पूरी तरह सरकारी प्रयासों पर आधारित थी, लेकिन 1990 के दशक में निजीकरण और 2000 के बाद मोबाइल फोन की आमद ने इसे और आगे बढ़ाया।
राजीव गांधी का योगदान दूरदर्शिता का था। उन्होंने “टेक्नोलॉजी को आम आदमी तक पहुंचाने” का सपना देखा और उसकी शुरुआत की। उस दौर में लिए गए दूरदर्शी निर्णय के कारण ही आज भारत IT क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है।
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आज 21 मई, जब हम आपको याद करते हैं, तो दिल में एक गहरी पीड़ा और गर्व का मिश्रण उभरता है। आपने मात्र 40 वर्ष की आयु में देश की बागडोर संभाली और भारत को आधुनिक युग की ओर ले जाने का सपना देखा।
आपका विजन था — एक मजबूत, समृद्ध और प्रगतिशील भारत।
21 मई 1991 को आपने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। लेकिन आपकी विचारधारा, आपकी ऊर्जा और आपका सपना आज भी जीवित है।
आधुनिक भारत के शिल्पकार, महान देशभक्त, बेहद सरल और दूरदर्शी नेता राजीव जी को उनके शहादत दिवस पर शत शत नमन। 💐💐
राजीव गांधी अमर रहें।
भारत माता की जय। 🇮🇳🙏
