अंबेडकरनगर। करीब 14 वर्ष पुराने अपहरण मामले में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम परविंद कुमार की अदालत ने आरोपी दीपचंद्र सिंह को दोषमुक्त कर दिया। बसखारी क्षेत्र से जुड़े इस चर्चित मामले में अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
इसके साथ ही अदालत ने कथित पीड़िता और वादी पिता को मामले में गलत साक्ष्य प्रस्तुत करने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश भी दिए हैं।
मामला क्या था?
बसखारी क्षेत्र के एक व्यक्ति ने 8 मई 2011 को शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिग बहन और 12 वर्षीय पुत्र को दीपचंद्र सिंह, निवासी सम्मोपुर बनियानी (हंसवर), बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। शिकायत के अनुसार, काफी तलाश के बाद दोनों के दिल्ली में होने की जानकारी मिली थी।
इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की और विवेचना के बाद आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। मामला आगे चलकर सत्र न्यायालय में विचारण के लिए भेजा गया।
सुनवाई के दौरान क्या सामने आया?
सुनवाई के दौरान वादी, उसकी मां, कथित अपहृता और अन्य गवाहों सहित कुल सात गवाह अदालत में पेश हुए। हालांकि, सुनवाई के दौरान कई गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए।
पीड़िता ने अदालत में बयान देते हुए कहा कि आरोपी उसे बहला-फुसलाकर नहीं ले गया था, बल्कि वह अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी। उसने यह भी बताया कि बाद में उसने दीपचंद्र से विवाह कर लिया और वर्तमान में उसके चार बच्चे हैं।
अदालत का फैसला
सत्र न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाह अदालत में अभियोजन के कथानक का समर्थन नहीं कर सके। साक्ष्यों के अभाव में आरोप सिद्ध नहीं हो पाए, जिसके चलते आरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया।
फैसले के बाद न्यायिक हिरासत में बंद आरोपी की रिहाई का आदेश भी जारी किया गया।
अदालत की अतिरिक्त कार्रवाई
अदालत ने वादी और पीड़िता के खिलाफ कथित रूप से गलत साक्ष्य प्रस्तुत करने के मामले में प्रकीर्ण वाद दर्ज करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।