धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले के अलकडीहा क्षेत्र में हाल ही में पारंपरिक चरक पूजा (चड़क पूजा) का आयोजन किया गया। यह उत्सव मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन लोक परंपरा है, जो झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, असम और बांग्लादेश के ग्रामीण क्षेत्रों में भी चैत्र संक्रांति (अप्रैल के मध्य) के अवसर पर मनाया जाता है। यह गाजन उत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस पूजा के आयोजन से घर में सुख-शांति बनी रहती है, अच्छी फसल की कामना पूरी होती है और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। इस अवसर पर श्रद्धालु अपनी आस्था व्यक्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के पारंपरिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। कुछ भक्त कठिन तप या शारीरिक कष्ट सहने वाले धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।
इस पूजा का एक प्रमुख आकर्षण “चरक” नामक ऊंचा लकड़ी का ढांचा होता है, जिस पर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। इसे कई स्थानों पर ‘नील पूजा’ या ‘हजरा पूजा’ के नाम से भी जाना जाता है।
चरक पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि ग्रामीण समुदायों को जोड़ने वाला एक सांस्कृतिक उत्सव भी है। यह परंपरा स्थानीय समाज की आस्था, एकता और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती आ रही है।
1 Comment
Pooja Kumari
April 15, 2026Is tarah k kritya public place pr nhi karna chahiye , teenagers urge for taking adventure for enjoying as heros , or aisa karna v kafi muskil h