झारखंड की पहचान को मिला वैश्विक सम्मान: राज्य के 11 पारंपरिक उत्पादों को मिला GI टैग,
झारखंड की पारंपरिक शिल्प कौशल और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक सम्मान मिला है. इस वर्ष राज्य के 11 पारंपरिक उत्पादों को GI टैग मिला है.
रांची:झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है. झारखंड के कुल 11 विशिष्ट उत्पादों को GI टैग मिला है. जिसमें 04 को GI टैग दिलाने में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है. इस वर्ष (2026) जिन 11 उत्पादों को GI टैग मिला है, उसमें कोडरमा का केसरिया कलाकंद, कुचाई सिल्क, मुंडा सिल्क सहित 11 उत्पाद शामिल है. हालांकि इसके पूर्व वर्ष 2021 में सोहराई कोहबर पेंटिंग-Sohrai Khovar Painting को GI tag मिला था.
नाबार्ड के सहयोग और सतत प्रयास से विकसित राज्य की चार विशिष्ट उत्पादों भगैया सिल्क, कुचाई सिल्क, मुंडा ज्वेलरी और झारखंड बांस शिल्प को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication-GI टैग) मिला है. यह उपलब्धि न केवल झारखंड की पारंपरिक कला, शिल्प और ज्ञान प्रणाली को संरक्षण प्रदान करेगी, बल्कि हजारों कारीगरों, बुनकरों और ग्रामीण उत्पादकों की आजीविका को भी नई मजबूती देगी. GI टैग किसी उत्पाद की विशिष्ट भौगोलिक पहचान और उसकी प्रामाणिकता का प्रमाण होता है, जिससे बाजार में उसकी अलग पहचान बनती है और बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है
झारखंड नाबार्ड के अनुसार, यह सफलता उत्पादक समूहों, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), विभिन्न सरकारी विभागों, तकनीकी संस्थानों और अन्य हितधारकों के साथ वर्षों तक किए गए सामूहिक प्रयासों का परिणाम है. नाबार्ड ने इन उत्पादों की विशिष्टताओं की पहचान करने, दस्तावेजीकरण कराने, उत्पादकों को संगठित करने, मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने और GI पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.