अचानकमार टाइगर रिजर्व को बढ़ी बाघों चहलकदमी स्थानीय लोगों मे दहशत का माहौल
अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR), कोटा और बेलगहना के जंगलों में बाघों की बढ़ती आवाजाही ग्रामीणों में दहशत; जोगीपुर में बनेगी निगरानी चौकी
[बिलासपुर, कोटा, बेलगहना ]
अचानकमार टाइगर रिजर्व, कोटा और बेलगहना के जंगलों में बाघों की आवाजाही काफी बढ़ गई है, जिससे आसपास के ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में एटीआर में 4 बाघिनें हैं, जिनके कुल 6 शावक हैं। इन बाघों और शावकों का अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार आना-जाना बना हुआ है। ग्रामीणों की सुरक्षा और स्थिति पर नज़र रखने के लिए अब जोगीपुर में एक विशेष निगरानी चौकी खोली जा रही है, जो 24 घंटे काम करेगी।
घटना का विवरण और लगातार हमले
बीती 25 अगस्त को बांढा गांव निवासी धर्मजीत ध्रुवहरे जंगल में फिरी और करील बीनने गए थे, तभी उनका सामना एक बाघिन से हो गया। बाघिन को सामने देखकर युवक डरकर भागा, तो उसने पीछे से हमला कर दिया, जिससे मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। इसके कुछ ही समय बाद, कोटा के दवनपुर निवासी किसान संजू मरकाम के बैल पर भी बेलगहना क्षेत्र में बाघ ने हमला कर दिया। जंगलों में लगाए गए ट्रैप कैमरों में बाघों की तस्वीरें लगातार कैद हो रही हैं, जिससे अधिकारियों और ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।
प्रशासन और वन विभाग के निर्देश
जंगल जाने पर सख्त रोक: जोगीपुर से बांढा जाने वाले मार्ग पर बाघ की आवाजाही के चलते वन विभाग ने अवैध और अनधिकृत आवाजाही को पूरी तरह रोकने की तैयारी कर ली है। इसके तहत जोगीपुर से बांढा के जंगल जाने वाले मार्ग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जहां फॉरेस्ट गार्ड और चौकीदार 24 घंटे तैनात रहेंगे।
फील्ड डायरेक्टर का बयान: प्रियंका पाण्डेय, फील्ड डायरेक्टर, एटीआर का कहना है कि एटीआर का खूबसूरत और प्राकृतिक माहौल बाघों को बहुत भा रहा है। यदि लोग जंगलों में जाना बंद कर दें, तो इंसानों और जंगली जानवरों के बीच का यह द्वंद्व अपने आप खत्म हो जाएगा।
विशेष जन-जागरूकता अभियान: वन विभाग का मानना है कि गुस्से में आकर ग्रामीण किसी वन्यजीव को नुकसान न पहुँचाएं, इसलिए विभाग ग्रामीणों की मानसिकता को समझने और बाघों के प्रति उनकी समझ बेहतर करने के लिए विशेष टीमें गठित कर रहा है जो लगातार संवाद कर रही हैं।