ढाई साल से अटकी नियुक्ति की राह: सुप्रीम कोर्ट ने 1,362 एएनएम अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का दिया निर्देश,
बिहार ANM भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देश, 1,362 अभ्यर्थियों की अर्हता जांच के बाद नियुक्ति का रास्ता साफ
लेखक : विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
पटना : बिहार में सहायक नर्स (एएनएम/ANM) पद की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति पामिदिघंटम श्री नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की खंडपीठ ने 25 अगस्त 2026 को सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत के समक्ष उपस्थित हस्तक्षेपकर्ताओं सहित 1,362 अभ्यर्थियों की नियुक्ति एएनएम पद पर की जानी चाहिए, हालांकि नियुक्ति से पहले उनकी निर्धारित योग्यता का सत्यापन किया जाएगा।
यह आदेश पटना उच्च न्यायालय के 29 अप्रैल 2024 के एलपीए नंबर 322/2024 के फैसले के विरुद्ध दाखिल एसएलपी (सिविल) संख्या 12696/2024 — अंजलि कुमारी बनाम अर्चना कुमारी एवं अन्य — से संबंधित है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह प्रकरण बिहार तकनीकी सेवा आयोग द्वारा एएनएम पद के लिए जारी भर्ती विज्ञापन से जुड़ी नियुक्ति प्रक्रिया और उससे संबंधित न्यायिक विवाद से सामने आया है।
एक ही आदेश में एसएलपी संख्या 12696/2024 के साथ-साथ एसएलपी संख्या 13220/2024, 12430/2024, 19326/2024, 19327/2024, 19328/2024 तथा 2024-26 के बीच दाखिल कई डायरी नंबर और छह रिट याचिकाएं भी सूचीबद्ध हैं। इनमें देरी की माफी, अंतरिम राहत और हस्तक्षेप/इंप्ली़डमेंट से संबंधित आवेदन शामिल हैं।
रिकॉर्ड ऑफ प्रोसीडिंग्स के अनुसार, 3 फरवरी 2026 के पूर्व आदेश के अनुपालन में बिहार सरकार के स्थायी अधिवक्ता श्री मनीष कुमार ने राज्य सरकार से निर्देश प्राप्त किए। इसके बाद अदालत ने 25 अगस्त 2026 को मामले में आगे की प्रक्रिया के संबंध में निर्देश दिए।
1,362 अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत के समक्ष उपस्थित हस्तक्षेपकर्ताओं सहित कुल 1,362 अभ्यर्थियों की नियुक्ति एएनएम पद पर की जानी चाहिए। हालांकि, नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने से पहले राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित अभ्यर्थी निर्धारित शैक्षणिक एवं अन्य आवश्यक योग्यताएं पूरी करते हैं।
अर्हता के सत्यापन और परीक्षण के लिए राज्य सरकार दो-सदस्यीय समिति गठित कर सकती है। अदालत ने पूरी प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
7 से 12 सितंबर के बीच दस्तावेज सत्यापन
अभ्यर्थियों के अधिवक्ताओं की सहमति से तय हुआ कि संबंधित अभ्यर्थी 7 सितंबर से 12 सितंबर 2026 के बीच समिति के समक्ष उपस्थित होंगे। इसके संबंध में अभ्यर्थियों को पहले से सूचना दी जाएगी।
राज्य के स्थायी अधिवक्ता मनीष कुमार अगली सुनवाई तक प्रक्रिया की स्थिति और अनुपालन से संबंधित जानकारी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब राज्य सरकार के सामने सबसे महत्वपूर्ण कार्य अभ्यर्थियों की निर्धारित योग्यता का सत्यापन और संबंधित प्रक्रिया को समयसीमा में पूरा करना है। दो-सदस्यीय समिति के माध्यम से दस्तावेजों और पात्रता की जांच की जा सकती है।
अभ्यर्थियों के लिए 7 से 12 सितंबर के बीच होने वाली प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। उन्हें निर्धारित तिथि पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ समिति के समक्ष उपस्थित होना होगा।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता महत्वपूर्ण
एएनएम पद स्वास्थ्य सेवाओं से सीधे जुड़ा हुआ है। इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया में पात्र अभ्यर्थियों का सत्यापन पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की स्थिति अगली सुनवाई में स्पष्ट होगी।
13 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से प्रक्रिया की प्रगति और अनुपालन से संबंधित जानकारी अदालत के समक्ष रखी जा सकती है।
निष्कर्ष
बिहार एएनएम भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट के 25 अगस्त 2026 के निर्देश से अदालत के समक्ष उपस्थित 1,362 अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता बना है। हालांकि, नियुक्ति से पहले निर्धारित योग्यता का सत्यापन आवश्यक है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार निर्धारित समयसीमा के भीतर सत्यापन और नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया को किस प्रकार पूरा करती है। अगली सुनवाई में इस संबंध में स्थिति और अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।