बोधगया पहुंची संसदीय स्थायी समिति: महाबोधि मंदिर में दर्शन, बोधि वृक्ष का अवलोकन; आईटीसी होटल में बिहार गौरव गान से सजी सांस्कृतिक संध्या,
विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
बोधगया : भारतीय संसद की परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति संबंधी स्थायी समिति का प्रस्तावित गया अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम रविवार-सोमवार को शुरू हुआ।
समिति के सभापति, राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा के नेतृत्व में सदस्यगण सोमवार शाम गया पहुंचे और बोधगया स्थित विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान बुद्ध की प्रतिमा के दर्शन किए तथा पवित्र बोधि वृक्ष का अवलोकन किया।
समिति के सदस्यों ने बौद्ध धर्म एवं बोधगया की ऐतिहासिक, धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने सभापति व सदस्यों का पारंपरिक अंदाज़ में स्वागत किया।
आईटीसी होटल में सांस्कृतिक संध्या:
मंदिर-दर्शन के पश्चात आईटीसी होटल, बोधगया में समिति के सम्मान में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कि गई, जिसमें बिहार गौरव गान सहित राज्य की लोक-परंपरा पर आधारित प्रस्तुतियां शामिल थीं।
"बोधगया की वैश्विक बौद्ध विरासत को निकट से समझने का प्रयास"
अध्ययन भ्रमण का व्यापक संदर्भ,
बातचीत में सांसद संजय झा ने बताया कि समिति पटना में बिहार म्यूज़ियम व खुदा बख्श लाइब्रेरी का निरीक्षण करने के बाद गया पहुंची है, जहां मंगलवार को पर्यटन विषयक बैठक होनी है।
झा के अनुसार समिति बिहार में सड़क व राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं — जैसे पटना-पूर्णिया, गोरखपुर-सिलीगुड़ी तथा एनएच-27 — की समीक्षा के साथ-साथ बोधगया, राजगीर व नालंदा जैसे पर्यटन स्थलों के विकास पर भी चर्चा करेगी।
समिति की सिफारिशें रिपोर्ट के रूप में संसद में प्रस्तुत की जाएंगी, जिसके आधार पर संबंधित विभाग आगे की कार्रवाई करेंगे।
ज़मीनी सवाल :
समिति की गया-यात्रा का मूल उद्देश्य पर्यटन ढांचे, एएसआई-संरक्षित स्थलों की स्थिति और सड़क परियोजनाओं की समीक्षा है — असली परीक्षा यह होगी कि मंगलवार की बैठक में क्षेत्र की वास्तविक अवसंरचनात्मक कमियों (जैसे बोधगया में यातायात प्रबंधन, पर्यटक सुविधाएं) पर कितनी ठोस चर्चा होती है, केवल औपचारिक स्वागत-समारोहों तक सीमित न रहकर।
निष्कर्ष :
संसदीय स्थायी समिति का बोधगया आगमन और यह गया-बोधगया क्षेत्र के पर्यटन व सांस्कृतिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करता है।
किंतु मंगलवार को होने वाली वास्तविक पर्यटन-समीक्षा बैठक ही यह तय करेगी कि यह दौरा केवल प्रतीकात्मक रहा या इससे क्षेत्र के लिए ठोस नीतिगत लाभ निकलेगा।