आवास प्लस सूची से 16000/- परिवार बाहर 4571 लाभार्थी को पहले ही आबंटित हो चुका है आवास
बिलासपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत तैयार की गई आवास प्लस 2024 सूची में पात्रता जांच के बाद बड़ी संख्या में परिवारों के नाम बाहर किए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, जिले में सर्वे और सत्यापन के बाद 16 हजार से अधिक आवेदन अपात्र पाए गए हैं। अकेले बिल्हा ब्लॉक में 5,196 आवेदन निरस्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पात्रता जांच में सामने आए कई कारण
रिपोर्ट के मुताबिक, अपात्र घोषित किए गए आवेदनों में कई ऐसे परिवार भी शामिल हैं जिन्हें पहले ही सरकारी आवास योजना का लाभ मिल चुका है। आंकड़ों के अनुसार 4,571 मामलों में हितग्राहियों को पहले ही सरकारी आवास का लाभ मिल चुका था।
इसके अलावा 3,886 आवेदकों के पास पक्का मकान, जबकि 3,201 परिवारों के घर पक्की छत और पक्की दीवारों वाले पाए गए। वहीं 2,515 परिवारों की वार्षिक आय दो लाख रुपये से अधिक होने के कारण वे पात्रता के दायरे से बाहर हो गए।
ये बताए गए अपात्रता के प्रमुख कारण
रिपोर्ट में छह प्रमुख कारणों का उल्लेख किया गया है—
4,571 — पहले ही आवास योजना का लाभ मिल चुका
3,886 — वर्तमान में पक्का मकान उपलब्ध
3,201 — पक्की छत व पक्की दीवार वाला मकान
2,515 — परिवार की वार्षिक आय ₹2 लाख से अधिक
1,829 — परिवार में 16 से 59 वर्ष का कमाने योग्य सदस्य
1,143 — सरकारी नौकरी, चार पहिया वाहन या इनकम टैक्स के दायरे में
बिल्हा में सबसे ज्यादा आवेदन निरस्त
ब्लॉकवार उपलब्ध आंकड़ों में बिल्हा में 5,196, मस्तूरी में 4,370, कोटा में 4,199 और तखतपुर में 2,234 आवेदन अपात्र पाए गए हैं। कुल संख्या 15,999 बताई गई है।
प्रशासन के अनुसार, पात्रता की शर्तों का कड़ाई से पालन करना जरूरी है, ताकि वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी आवास योजना का लाभ पहुंचाया जा सके।
अपात्र आवेदकों को आपत्ति का अवसर
रिपोर्ट में जिला पंचायत प्रशासन की ओर से बताया गया है कि सर्वे में गलत या त्रुटिपूर्ण तरीके से अपात्र किए गए आवेदकों की सहायता के लिए प्रक्रिया उपलब्ध है। संबंधित आवेदक ऑनलाइन पोर्टल पर अपात्र किए जाने का कारण देख सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 17 से 30 सितंबर तक संबंधित जनपद पंचायत में सीधे आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था भी बताई गई है।
प्रशासन की चुनौती
आवास प्लस सर्वे में बड़ी संख्या में आवेदन अपात्र होने के बाद अब प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि वास्तविक रूप से पात्र और जरूरतमंद परिवार किसी तकनीकी या सर्वे संबंधी त्रुटि के कारण योजना के लाभ से वंचित न रहें। वहीं, अपात्र आवेदनों को हटाने से सरकारी संसाधनों का लाभ निर्धारित पात्रता वाले परिवारों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।