Brics सम्मेलन के बाद mcd आयुक्त श्री संजीव खिरवार की निगम से विदाई की अटकलें तेज़
राजधानी दिल्ली में पिछले एक वर्ष के दौरान सेदुलाजाब मुस्तफाबाद ,बुराड़ी ,रोहिणी ,सत्य निकेतन में लगातार सामने आए भवन ध्वंस और मालवीय नगर अग्निकांड ने नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सत्य निकेतन पीजी बिल्डिंग हादसे के बाद एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार विपक्ष के साथ-साथ छात्र राजनीति के भी निशाने पर हैं।
सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने और उसमे हुई छात्रों की मौत के बाद भारतीय जनता पार्टी की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए एमसीडी मुख्यालय विरोध प्रदर्शन किया था दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव से पहले यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं में बढ़ते असंतोष को देखते हुए यह मुद्दा चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है और विपक्षी छात्र संगठन अपने खोये हुए छात्र जनादेश को पुनः पाने के लिए इस मामले को जोर शोर से उठा रहे हैं
पिछले एक वर्ष में दिल्ली के सैदुलाजाब, सत्य निकेतन सहित कई इलाकों में इमारत गिरने की घटनाओं ने भवन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। हाल में सत्य निकेतन की पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने से सात लोगों की मौत हुई, जबकि जांच के बाद कई एमसीडी अधिकारियों को निलंबित करना पड़ा। इससे पहले दक्षिण दिल्ली में एक अन्य भवन ध्वंस की मजिस्ट्रियल जांच में भी अवैध निर्माण और निगरानी में गंभीर चूक के लिए एमसीडी की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सत्य निकेतन मामले में एमसीडी की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी
इसी वर्ष जून में दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर (हौज़ रानी) स्थित एक बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) में लगी भीषण आग में 23 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में भवन स्वीकृति, लाइसेंस प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों को लेकर विभिन्न विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठे। बाद में जांच में लाइसेंस मंजूरी प्रक्रिया में भी प्रशासनिक खामियां सामने आईं, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की गई।
विशेष बात यह रही कि दक्षिण जोन के कुछ ऐसे एमसीडी अधिकारी, जो मालवीय नगर अग्निकांड के समय भी तैनात थे, बाद में सत्य निकेतन हादसे के बाद निलंबित अधिकारियों में शामिल पाए गए। इससे जवाबदेही को लेकर बहस और तेज हो गई।
लगातार सामने आ रहे हादसों ने एमसीडी की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। भवन गिरने, अवैध निर्माण और अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन में कथित ढिलाई को लेकर आम लोगों के बीच असंतोष बढ़ा है। कई रिपोर्टों में यह सवाल उठाया गया कि आखिर हर बड़ी त्रासदी के बाद कार्रवाई क्यों होती है और पहले प्रभावी निगरानी क्यों नहीं दिखाई देती।
सत्य निकेतन हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर तेज कार्रवाई देखने को मिली। ग्रह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा स्वयं पूरे मामले को संज्ञान में लिया गया और त्वरित कार्यवाही करते हुए उनके दिशा निर्देश पर कई अधिकारियों को निलंबित किया गया और उपराज्यपाल ने छात्र पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मंजूरी दी,
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि BRICS शिखर सम्मेलन के बाद एमसीडी के शीर्ष प्रशासन में बदलाव हो सकता है। हालांकि, अभी तक केंद्र सरकार या दिल्ली प्रशासन की ओर से संजीव खिरवार को हटाने संबंधी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है।