MOHIT NAGAR FIRM
मोहितनगर फार्म: कृषि अनुसंधान और विकास गतिविधियों के बीच बुनियादी ढांचे पर उठ रहे सवाल
जलपाईगुड़ी के मोहितनगर क्षेत्र स्थित कृषि एवं बागवानी संस्थानों में विभिन्न फसलों, बागवानी और कृषि अनुसंधान से जुड़ी गतिविधियां संचालित होती हैं। यहां आईसीएआर-सीपीसीआरआई का रिसर्च सेंटर भी कार्यरत है, जहां नारियल, सुपारी और कोको जैसी फसलों पर अनुसंधान किया जाता है।
मोहितनगर सुपारी की एक विकसित किस्म के लिए भी जाना जाता है। आईसीएआर के अनुसार, मोहितनगर किस्म से प्रति पौधा प्रति वर्ष लगभग 3.67 किलोग्राम सूखी गिरी का उत्पादन दर्ज किया गया है। इस क्षेत्र में बागवानी गतिविधियों के तहत ड्रैगन फ्रूट, देशी धान की किस्मों और कोको के पौधों से संबंधित कार्य भी किए जा रहे हैं।
मोहितनगर स्थित बागवानी फार्म में किसानों के लिए फसल विविधीकरण और इंटरक्रॉपिंग से जुड़ी गतिविधियां भी महत्वपूर्ण हैं। सुपारी जैसे स्थायी पौधों के साथ काली मिर्च, हल्दी, केला और पपीता जैसी फसलों को शामिल करने से अतिरिक्त कृषि आय की संभावनाओं पर काम किया जाता है।
इसके अलावा, क्षेत्र में पशुपालन और पोल्ट्री से जुड़ी सरकारी तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाली गतिविधियों का भी उल्लेख मिलता है। इससे मोहितनगर फार्म क्षेत्र की गतिविधियां केवल एक फसल तक सीमित नहीं रहने का संकेत देती हैं।
हालांकि, मोहितनगर फार्म के विकास और बुनियादी ढांचे को लेकर अब विस्तृत दस्तावेजी समीक्षा की जरूरत दिखाई देती है। पूर्व में विकास परियोजनाओं और सरकारी फंडिंग से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, लेकिन इन परियोजनाओं पर स्वीकृत राशि, वास्तविक खर्च, उपयोगिता प्रमाणपत्र और वर्तमान परिसंपत्तियों की स्थिति को अलग-अलग स्तर पर जांचना जरूरी होगा।
इस संदर्भ में यह सवाल उठता है कि जिन विकास कार्यों और संसाधनों के लिए सरकारी धन उपलब्ध कराया गया, उनका वर्तमान में कितना प्रभाव दिखाई देता है। इसका निष्पक्ष आकलन करने के लिए सरकारी रिकॉर्ड, परियोजना पूर्णता रिपोर्ट, निरीक्षण रिपोर्ट और फार्म की मौजूदा स्थिति की तुलना आवश्यक होगी।
इसलिए फिलहाल इसे “विकास नहीं हुआ” के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय सरकारी निवेश, पूरे किए गए विकास कार्यों और मौजूदा बुनियादी ढांचे की स्थिति की समीक्षा के रूप में देखा जाना अधिक उचित होगा।