मुद्दा. सिगरेट बुझ जाए तो ठीक, परिवार की समझ बुझ जाए तो कोई बात नहीं
सिगरेट का धुआं सिर्फ पीने वाले तक सीमित नहीं, परिवार पर भी पड़ता है असर
आनन्द कुमार द्विवेदी/कौशाम्बी ब्यूरो: सिगरेट पीने वाले व्यक्ति के आसपास मौजूद लोगों पर भी तंबाकू के धुएं का असर पड़ सकता है। इसे पैसिव या सेकंड-हैंड स्मोकिंग कहा जाता है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2023 में सेकंड-हैंड स्मोक के कारण अनुमानित 3 लाख 25 हजार 600 मौतें हुईं, जबकि 1990 में यह संख्या करीब 2 लाख 17 हजार 700 थी। यानी इस अवधि में ऐसे मामलों से जुड़ी अनुमानित मौतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सेकंड-हैंड स्मोकिंग का प्रभाव केवल धूम्रपान करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। घर, कार्यस्थल या अन्य स्थानों पर लगातार धुएं के संपर्क में रहने वाले लोगों को भी स्वास्थ्य संबंधी जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। उपलब्ध अध्ययन भारत में करोड़ों लोगों के इसके संपर्क में आने की ओर भी संकेत करता है।
सेकंड-हैंड स्मोकिंग को हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है। बच्चों में इसके संपर्क से श्वसन संबंधी संक्रमण और अस्थमा जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। गर्भावस्था के दौरान तंबाकू के धुएं से बचाव को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में सेकंड-हैंड स्मोकिंग से संबंधित अनुमानित मौतों में करीब 1 लाख 56 हजार 900 महिलाएं और 1 लाख 68 हजार 700 पुरुष शामिल थे। वैश्विक स्तर पर भी बड़ी संख्या में लोग सेकंड-हैंड स्मोक के संपर्क में आते हैं। ऐसे आंकड़े इस समस्या के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव को रेखांकित करते हैं।
परिवारों में इसका प्रभाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि घर के किसी सदस्य को धूम्रपान की आदत है, तो बच्चों और अन्य सदस्यों को अनजाने में धुएं के संपर्क में आना पड़ सकता है। इसलिए घर के अंदर धूम्रपान से बचना परिवार के अन्य सदस्यों के स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान को नियंत्रित करने के लिए कानून और नियम मौजूद हैं। इन नियमों का प्रभावी पालन सेकंड-हैंड स्मोक के संपर्क को कम करने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही लोगों में तंबाकू के धुएं से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है।
सेकंड-हैंड स्मोकिंग से जुड़ा स्वास्थ्य बोझ केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे प्रभावित परिवार और व्यक्ति होते हैं। इसलिए धूम्रपान करने वालों के साथ-साथ उनके आसपास मौजूद लोगों को भी इसके प्रभावों को समझना और धुएं के अनावश्यक संपर्क से बचना जरूरी है।
नोट: लेख में दिए गए मृत्यु और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े अध्ययन आधारित अनुमान हैं। किसी व्यक्ति की बीमारी या मृत्यु का कारण निर्धारित करने के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक होता है।