सीएम डॉ. यादव ने जनजातीय नायकों को किया नमन, कहा- इन पर बनाएं फिल्में, सरकार करेगी सहयोग
जबलपुर में राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर CM मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि
जबलपुर: जनजातीय महानायक राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस के अवसर पर 18 सितंबर को जबलपुर में समारोह आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोनों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से पहले अपने गीतों और कविताओं के माध्यम से लोगों में स्वतंत्रता की भावना जगाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि दोनों ने अपनी रचनात्मकता और विचारों के माध्यम से समाज को प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा शंकर शाह के साथ उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह ने भी अंग्रेजी शासन के खिलाफ गतिविधियों को आगे बढ़ाया। उनके अनुसार, अंग्रेजों ने दोनों को गिरफ्तार कर बंदी बनाया और बाद में उन्हें तोप के मुंह के सामने खड़ा कर दंडित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके बलिदान और विचार आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का विषय हैं।
डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय समाज के महापुरुषों और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े नायकों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार रानी दुर्गावती, राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह सहित अन्य जनजातीय महापुरुषों के जीवन और योगदान को सामने लाने के लिए विभिन्न योजनाओं में सहयोग करेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनजातीय महापुरुषों के जीवन पर फिल्म निर्माण सहित अन्य माध्यमों के जरिए उनके इतिहास और योगदान को लोगों तक पहुंचाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने पाठ्यक्रमों में ऐसे महापुरुषों से संबंधित विषयों को शामिल किए जाने का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सिकल सेल बीमारी की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के संबोधन में राजनीतिक दलों और केंद्र सरकार की नीतियों से संबंधित टिप्पणियां भी शामिल थीं। इन टिप्पणियों को उनके कार्यक्रम में दिए गए वक्तव्य के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। समारोह का मुख्य केंद्र राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान तथा उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करना रहा।
Chief Editor: Abhay Parouha