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पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र और बाघ गलियारे के विरोध ने सह्याद्रि संरक्षण पर उठाए सवाल

By SAMEER JEEVANRAO KATAKE • 2026-09-12 05:12 • 33 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र और बाघ गलियारे के विरोध ने सह्याद्रि संरक्षण पर उठाए सवाल

सह्याद्रि संरक्षण पर बहस: पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र और बाघ गलियारे को लेकर उठे सवाल

कोल्हापुर, महाराष्ट्र | संवाददाता: कोल्हापुर जिले के राधानगरी, गगनबावड़ा और भुदरगढ़ तालुकों में पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) और बाघ गलियारे से जुड़े संरक्षण उपायों को लेकर पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय विकास के बीच संतुलन को लेकर चर्चा है।

पश्चिमी घाट का यह क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां विभिन्न प्रकार के पौधों, वन्यजीवों, पक्षियों और अन्य प्रजातियों का आवास है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े पक्षों का कहना है कि अनियोजित निर्माण, आवास विखंडन और बढ़ता मानवीय दबाव संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित कर सकता है।

दूसरी ओर, स्थानीय किसानों और निवासियों के बीच यह चिंता भी सामने आती है कि संरक्षण संबंधी नियमों का असर कृषि, पारंपरिक आजीविका और क्षेत्र में भविष्य की विकास गतिविधियों पर पड़ सकता है। ऐसे में संरक्षण उपायों के साथ स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।

विशेषज्ञों और स्थानीय हितधारकों के बीच इस बात पर जोर दिया जाता रहा है कि पर्यावरणीय निर्णय वैज्ञानिक आकलन और स्थानीय स्तर की वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर लिए जाएं। इसके साथ ही प्रभावित गांवों के लोगों की भागीदारी और उनकी चिंताओं को सुनने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

सह्याद्रि के पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन बनाने के लिए संरक्षण नीतियों को पारदर्शी तरीके से लागू करना आवश्यक है। इस दिशा में वैज्ञानिक अध्ययन, प्रशासनिक समीक्षा और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मुख्य चुनौती यही है कि जैव विविधता और वन्यजीव आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए स्थानीय लोगों के कृषि, आजीविका और विकास से जुड़े हितों का भी ध्यान रखा जाए।

नोट: ESZ और वन्यजीव गलियारों से जुड़े नियम, सीमाएं और अनुमत गतिविधियां संबंधित अधिसूचनाओं तथा प्रशासनिक निर्णयों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। किसी विशेष क्षेत्र से जुड़ी स्थिति के लिए आधिकारिक अधिसूचना और संबंधित विभाग के रिकॉर्ड को आधार माना जाना चाहिए।

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