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तमिलनाडु में दुकानों के नाम-पट्टिका को लेकर मद्रास हाई कोर्ट का निर्देश, 1 नवंबर तक का समय
चेन्नई: तमिलनाडु में दुकानों के नाम-पट्टिकाओं में तमिल भाषा के इस्तेमाल को लेकर मद्रास हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अदालत ने व्यापारिक प्रतिष्ठानों को निर्धारित समय सीमा के भीतर नाम-पट्टिकाओं में तमिल भाषा का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कहा है। इसके लिए आगामी 1 नवंबर तक का समय दिया गया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा तक निर्देशों का पालन नहीं किए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों द्वारा लागू नियमों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
तमिल भाषा में नाम-पट्टिका का प्रावधान
इससे पहले तमिलनाडु सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की नाम-पट्टिकाओं में तमिल भाषा के इस्तेमाल पर जोर दिया गया था। नियमों के तहत तमिल के साथ अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल किए जाने की अनुमति का भी उल्लेख किया गया था।
नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित प्रावधानों के तहत जुर्माना या अन्य कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।
व्यापारिक संगठन ने मांगा अतिरिक्त समय
सरकार के दिशा-निर्देशों को लेकर व्यापारिक संगठन की ओर से अदालत में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान संगठन की ओर से कहा गया कि वह नियमों का पालन करने के लिए तैयार है, लेकिन दुकानों की मौजूदा नाम-पट्टिकाओं को बदलने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।
संगठन की ओर से अदालत से अतिरिक्त अवधि देने का अनुरोध किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने नाम-पट्टिकाओं में आवश्यक बदलाव के लिए 1 नवंबर तक का समय देने का निर्देश दिया।
निर्धारित समय सीमा के बाद कार्रवाई संभव
अदालत ने कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर नियमों का पालन नहीं करने वाले संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ सक्षम अधिकारी लागू कानून और नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं। इसके साथ ही मामले का निपटारा कर दिया गया।
व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश
अदालत के निर्देश के बाद संबंधित व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए अपनी नाम-पट्टिकाओं को निर्धारित नियमों के अनुरूप करने की आवश्यकता बढ़ गई है। व्यापारियों को नाम-पट्टिका से जुड़े स्थानीय नियमों और प्रशासनिक निर्देशों की जानकारी लेकर समय सीमा के भीतर आवश्यक बदलाव करने की सलाह दी जाती है।
तमिल भाषा के इस्तेमाल को लेकर यह मामला राज्य में भाषा संबंधी प्रशासनिक और व्यावसायिक नियमों के अनुपालन से जुड़ा है। निर्धारित समय सीमा के बाद नियमों के पालन की स्थिति पर संबंधित विभागों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।