लडभड़ोल (हिमाचल प्रदेश), 15 जून 2026।
लडभड़ोल क्षेत्र की प्रसिद्ध संतान दात्री मां सिमसा का मंदिर मंडी जिले की लडभड़ोल तहसील से लगभग 9 किलोमीटर दूर सिमस गांव में स्थित है। यह मंदिर बैजनाथ से लगभग 30-32 किलोमीटर की दूरी पर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जहां से आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में इस गांव में टोभा सिंह नामक व्यक्ति रहता था। महाशिवरात्रि के दिन वह नागण नामक स्थान पर कंदमूल खोदने गया। लोककथा के अनुसार, खुदाई के दौरान पहली चोट पर भूमि से दूध, दूसरी चोट पर जलधारा और तीसरी चोट पर रक्त जैसी लाल तरल सामग्री निकलने लगी। इससे वह भयभीत होकर घर लौट आया।
स्वप्न में माता के दर्शन की कथा
स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, उसी रात माता ने टोभा सिंह को स्वप्न में दर्शन दिए और बताया कि जिस स्थान पर वह खुदाई कर रहा था, वहां देवी की प्रतिमा स्थापित है। अगले दिन ग्रामीणों के साथ पुनः खुदाई करने पर एक देवी प्रतिमा प्राप्त हुई। मान्यता है कि प्रतिमा को पालकी में रखकर लाया गया और जहां वह भारी हो गई, वहीं उसकी स्थापना कर मंदिर का निर्माण किया गया।
संतान प्राप्ति से जुड़ी आस्था
मंदिर से जुड़ी एक प्रमुख मान्यता यह है कि संतान की इच्छा रखने वाले दंपति विशेष रूप से नवरात्र के दौरान यहां दर्शन के लिए आते हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता सिमसा स्वप्न के माध्यम से भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं। यह आस्था पीढ़ियों से क्षेत्र में प्रचलित है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
नवरात्र महोत्सव का विशेष महत्व
मां सिमसा मंदिर में प्रतिवर्ष चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान विशाल मेले आयोजित किए जाते हैं। इस अवसर पर मेला कमेटी और युवक मंडल सिमस द्वारा भंडारों तथा विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु माता के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं।
मां सिमसा मंदिर आज भी हिमाचल प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है और आस्था, परंपरा तथा स्थानीय संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।