शुक्रवार को दिल्ली की राउज़ एवेन्यू अदालत ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत 23 अभियुक्तों को कथित शराब घोटाला मामले में डिस्चार्ज कर दिया.
अदालत ने कहा कि उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है.
किसी जांच एजेंसी की चार्जशीट दायर होने के बाद अदालत मामले की सुनवाई करती है और सबूतों को प्रथम दृष्टया देख कर यह तय करती है कि किन धाराओं के तहत मुक़दमा चलना चाहिए.
अगर अदालत को पर्याप्त सबूत नहीं दिखे, तो अभियुक्तों को ‘डिस्चार्ज’ भी किया जा सकता है.हालांकि, डिस्चार्ज में कोर्ट केवल अभियोजन पक्ष का सबूत देखता है, और तय करता है कि प्रथम दृष्ट्या देख कर कोई भी गुनाह बनता नज़र नहीं आ रहा.
केजरीवाल और सिसोदिया के ख़िलाफ़ ये वही केस है जिसके तहत वे जेल गए थे. इसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो, यानी सीबीआई, का यह आरोप था कि दिल्ली में 2021 में लाई गई नई शराब की नीति के पीछे एक साज़िश थी, जहाँ कुछ निजी व्यवसायों के लाभ के लिए पॉलिसी को लाया गया था. बाद में इस पॉलिसी को हटा दिया गया था.
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि सीबीआई इस बात का कोई सबूत नहीं पेश कर पाई.549 पन्ने के फैसले में कोर्ट ने कई बार सीबीआई के जांच की कड़ी निंदा की.
कोर्ट ने कहा कि इस केस में जाँच की शुरुआत चुनाव प्रचार से जुड़ी कंपनियों से और छोटे व्यापारियों से हुई थी. फिर ये बढ़ते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं तक पहुंची.
कोर्ट का कहना था कि इस जाल का बढ़ना सबूतों पर आधारित नहीं था, बल्कि इस धारणा पर था कि पैसों का घोटाला हुआ है.
कोर्ट ने कहा, “कथित साज़िश शुरू से ही धीरे-धीरे कमजोर पड़ती गई है. ध्यान से देखने पर यह साफ़ होता है कि यह असल में सिर्फ अटकलों पर खड़ी एक कल्पित कहानी है, जिसके समर्थन में कोई कानूनी रूप से मान्य सबूत मौजूद नहीं है.”
कोर्ट ने यह भी कहा कि कुछ अभियुक्तों को ‘अप्रूवर’ विटनेस, यानी सरकारी गवाह बनाया गया था. हालांकि, इसके लिए कोर्ट ने कहा कि सही कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ.
कोर्ट ने कहा कि सबूतों को देख कर उनकी आशंका मज़बूत हो रही है कि हर बार पूछताछ करके, नए-नए आरोप जोड़ दिए गए, ताकि उन लोगों को भी मामले में फँसाया जा सके जिनके ख़िलाफ़ पहले से कोई ठोस आधार नहीं था.
कोर्ट ने कहा, “ऐसा लगता है कि अप्रूवर गवाह अभियोजन की पूरी कहानी का मुख्य स्रोत बना दिया गया है.कभी वह बिल्कुल नया आरोप सामने लाते हैं, तो कभी ऐसे बयान देते हैं जो सबूतों में मौजूद कमियों को भरने की कोशिश करता है.”सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को इस कथित घोटाले का मुख्य अभियुत बताया था. हालांकि कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे प्रथम दृष्टया भी यह बात साबित हो पाए.
कोर्ट ने कहा, “कोई भी सबूत यह नहीं दिखाता कि वह (मनीष सिसोदिया) कथित पैसों के लेन-देन में शामिल थे अभियोजन पक्ष उसके खिलाफ एक भी बरामदगी, दस्तावेज़ या पैसों के लेन-देन की कड़ी पेश नहीं कर पाई है जो उसे कथित फंड ट्रांसफर से जोड़ती हो.”
साथ ही, कोर्ट ने कहा कि सीबीआई के सबूतों में आपसी विरोधाभास था.
वहीं, कोर्ट ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को इस कथित घोटाले से जोड़ने के लिए कोई दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक बातचीत, वित्तीय लेन-देन या डिजिटल सबूत नहीं है.
कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल को मामले में अभियुक्त बनाने की कोशिश सिर्फ ऐसे बयान के आधार पर की गई है जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.जांच अफ़सर के ख़िलाफ़ इन्क्वायरी
इस मामले में अभियुक्त केवल केजरीवाल और सिसोदिया जैसे नेता नहीं थे, बल्कि जन सेवक, निजी व्यापारी और पॉलिटिकल पार्टी के स्वयंसेवक भी शामिल थे.
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जिस जाँच अफ़सर ने कुलदीप सिंह को अभियुक्त बनाया उनके ख़िलाफ़ पर्याप्त इंक्वायरी होनी चाहिए.
कुलदीप सिंह एक्साइज डिपार्टमेंट में डिप्टी कमिश्नर थे और कोर्ट ने कहा कि उनके ख़िलाफ़ कोई भी सबूत नहीं था.
कोर्ट ने कहा कि कुलदीप सिंह समेत एक और एक्साइज अफ़सर के ख़िलाफ़ केस एक सोचा-समझा अभ्यास था जहाँ उनकी भूमिका को बाद में जोड़ा गया ताकि एक पहले से सोचा गया ‘नैरेटिव’ बनाया जा सके.
4 Comments
Jamestup
May 9, 2026американская семейка смотреть from kinogo
CharlesBunda
May 9, 2026звірополіс спеши любить
uakino 433
May 9, 2026бал безумных женщин смотреть онлайн жена принца 21 века дорама
Michaellut
May 15, 2026Нужен финаносвый план? https://financedirector.by/investicionnyj-biznes-plan-struktura-i-primer-dlja-investorov/ подробное объяснение структуры документа, его роли в привлечении инвесторов, получении кредита и запуске бизнеса. Узнайте, какие разделы включает бизнес-план, какие расчеты нужны и как он помогает оценить прибыльность проекта.