June 27, 2026

सूखा डाम, नदारद बारिश से किसानों के सामने गहराया सिंचाई का संकट

बिजनौर। सामान्य से कम वर्षा और मानसून की धीमी प्रगति ने बिजनौर के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के एकमात्र पीली डाम का जलस्तर लगातार घटने से सिंचाई का संकट गहरा गया है। धान की रोपाई प्रभावित हो रही है, जबकि गन्ने जैसी नकदी फसलों की सिंचाई भी किसानों के लिए चुनौती बन गई है। सबसे अधिक प्रभाव अफजलगढ़ ब्लॉक के किसानों पर पड़ रहा है।

वर्ष 1962 में निर्मित पीली डाम की मूल जल भंडारण क्षमता 55 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) थी। वर्षों से सिल्ट जमा होने के कारण इसकी वर्तमान क्षमता घटकर लगभग 39 एमसीएम रह गई है। 1,490 एकड़ क्षेत्र में फैले इस डाम में उपलब्ध लगभग 17 एमसीएम पानी मई के अंत तक समाप्त हो चुका है। वर्तमान में सिंचाई के लिए डाम में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है।

पीली, बनैली, रामगंगा और धारा नदियों का पानी इस डाम में आता है। 115 वर्ग किलोमीटर के कैचमेंट क्षेत्र पर निर्भर यह जलाशय इस वर्ष मानसून पूर्व पर्याप्त वर्षा से भी वंचित रहा। अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे जल संचय की संभावना कमजोर बनी हुई है।

डाम से निकलने वाली लगभग एक दर्जन नहरें करीब 3,700 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई करती हैं। इनमें लगभग 2,200 हेक्टेयर क्षेत्र उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले तथा 1,500 हेक्टेयर क्षेत्र उत्तराखंड में स्थित है। उपलब्ध जल को देखते हुए सिंचाई विभाग ने मई तक ही नहरों में पानी छोड़ा था। वर्तमान परिस्थितियों में सितंबर 2026 से पहले दोबारा नहरों में पानी छोड़े जाने की संभावना कम बताई जा रही है।

जल संकट का सबसे अधिक असर धान की खेती पर दिखाई दे रहा है। समय पर पानी नहीं मिलने से धान की रोपाई प्रभावित हो रही है, जबकि गन्ने की फसल भी पर्याप्त सिंचाई के अभाव में प्रभावित होने लगी है। किसान निजी संसाधनों से सिंचाई करने को मजबूर हैं, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अच्छी वर्षा की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

Satyavir Singh

SATYAVIR SINGH

District Reporter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

INDIAN PRESS UNION

Indian Press Union (IPU) A National Platform for Journalists and Media Professionals.

© 2026 All Rights Reserved IPU MEDIA ASSOCIATION