लखनऊ, 16 मई 2026
सरकारी अस्पतालों में समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए अपनाई जा रही कंगारू मदर केयर (केएमसी) विधि प्रभावी साबित हो रही है। इस प्रक्रिया में केवल मां ही नहीं, बल्कि परिवार के अन्य सदस्य जैसे दादी, नानी और पिता भी नवजात की देखभाल में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह विधि नवजात मृत्यु दर कम करने और शिशु के स्वास्थ्य सुधारने में सहायक है।
दादी और नानी ने निभाई जिम्मेदारी
आगरा के लोहामंडी क्षेत्र की रहने वाली मीनू कुमारी (27) के नवजात शिशु को विशेष देखभाल की आवश्यकता थी। डॉक्टरों ने प्रतिदिन आठ घंटे केएमसी देने की सलाह दी, लेकिन शारीरिक कमजोरी के कारण मीनू ऐसा नहीं कर पा रही थीं। इसके बाद बच्चे की दादी मीरा (60) और नानी नीलम (50) ने जिम्मेदारी संभाली। नर्सिंग स्टाफ द्वारा प्रशिक्षण दिए जाने के बाद तीन घंटे नानी, तीन घंटे दादी और दो घंटे स्वयं मां ने केएमसी दी।
चार दिनों में शिशु का वजन लगभग 230 ग्राम बढ़ गया। दो किलोग्राम वजन के साथ जन्मे बच्चे का वजन अब 2.230 किलोग्राम हो गया है। बच्चा अब अधिक सक्रिय है और स्तनपान भी करने लगा है।
लेडी लॉयल महिला चिकित्सालय के एसएनसीयू नोडल अधिकारी डॉ. केके मिश्रा ने बताया कि परिवार के सहयोग से बच्चे की स्थिति में सकारात्मक सुधार देखने को मिला।
पिता ने भी निभाई अहम भूमिका
बहराइच जिले के बलहा ब्लॉक के मथुरा गांव निवासी राजेश, जो पेशे से राजमिस्त्री हैं, ने अपने नवजात बेटे की देखभाल के लिए लगातार 25 दिनों तक केएमसी दी। जन्म के समय बच्चे का वजन दो किलोग्राम था, जो बाद में घटकर 1.90 किलोग्राम रह गया था।
आशा कार्यकर्ता द्वारा परिवार को केएमसी अपनाने की सलाह दी गई। बच्चे की मां की तबीयत खराब होने के कारण राजेश ने प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक बच्चे को सीने से लगाकर रखा। इसके बाद शिशु का वजन बढ़कर 2.9 किलोग्राम हो गया।
एसएनसीयू इंचार्ज डॉ. असद अली के अनुसार समय से पहले जन्म और कम वजन नवजात मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
विशेषज्ञों ने बताए केएमसी के फायदे
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की बाल रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. शालिनी त्रिपाठी ने बताया कि कंगारू मदर केयर एक सरल, कम खर्चीली और प्रभावी विधि है, जिसमें केवल समय और नियमित देखभाल की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि यह विधि शिशुओं की स्थिति सुधारने, स्तनपान बढ़ाने और वजन वृद्धि में सहायक है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक डॉ. मिलिंद वर्धन ने बताया कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2016 से केएमसी कार्यक्रम को विस्तार दिया गया। वर्तमान में प्रदेश में 314 केएमसी लाउंज संचालित हैं। बीते वर्ष लगभग 93,158 नवजातों को इस विधि से लाभ मिला। साथ ही माताओं और परिवारों को घर पर भी केएमसी देने का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
क्या है कंगारू मदर केयर?
कंगारू मदर केयर में नवजात शिशु को टोपी, मोजे और लंगोट पहनाकर मां या परिवार का कोई सदस्य उसे अपने सीने से त्वचा-से-त्वचा संपर्क में रखता है। इससे शिशु को प्राकृतिक गर्माहट, सुरक्षा और पोषण मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार एक बार में कम से कम एक घंटे तक केएमसी देना लाभकारी माना जाता है।