ठाणे: कुछ दिन पहले ही महाराष्ट्र सरकार का परिवहन विभाग एक नियम लाया था जिसे लेकर ऑटो टैक्सी ड्राइवरों में खलबली मची हुई थी। इस नियम के मुताबिक, अगर कोई ऑटो-टैक्सी ड्राइवर मराठी भाषा में बोल, लिख या पढ़ नहीं पाता तो उसका लाइसेंस कैंसल कर दिया जाता। इस फैसले के खिलाफ ड्राइवरों ने आवाज उठाई थी और कहा था कि अगर 1 मई से इसे लागू किया जाता है तो पूरे प्रदेश में प्रदर्शन होंगे। अब महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनायक ने कहा है कि फिलहाल इस फैसले को होल्ड पर डाल दिया गया है। यानी यह नियम 1 मई 2026 से लागू नहीं होने वाला है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनायक ने इसी को लेकर सोमवार को एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक के बाद ही यह फैसला लिया गया कि फैसले को फिलहाल लागू नहीं किया जाएगा। मुंबई ऑटो रिक्शा संगठनों ने 4 मई को जो हड़ताल बुलाई थी अब उसे भी अब वापस ले लिया गया है यानी पूरी उम्मीद है कि अब ऑटो और टैक्सी ड्राइवर पहले की तरह ही अपने काम करते रहेंगे और उन्हें किसी तरह की समस्या नहीं आने वाली है। सरकार की ओर से बताया गया है कि भले ही मराठी ना बोल पाने वाले ड्राइवरों के लाइसेंस कैंसल नहीं होंगे लेकिन सरकार इस दिशा में कदम जरूर आगे बढ़ाएगी। इसके लिए 1 मई से 15 अगस्त तक सरकार की ओर से एक सर्वे करवाया जाएगा। सभी 59 रीजनल ट्रांसपोर्ट दफ्तरों में सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कितने ड्राइवर मराठी बोल पाते हैं और कितने नहीं बोल पाते हैं। इसी सर्वे के साथ फर्जी लाइसेंस, नकली बैज और बैज की गड़बड़ियों की जांच की जाएगी। यह भी बताया गया है कि जो ड्राइवर मराठी नहीं बोल पाते हैं उन्हें ट्रेनिंग सेंटर भेजा जाएगा और ट्यूशन भी दिलाया जाएगा ताकि वे मराठी बोलना सीख सकें। इस बारे में मंत्री प्रताप सरनायक ने कहा है, ‘कुछ दिन तक मौका देने के बाद हम इस नियम को सख्ती से लागू करेंगे।’ बता दें कि जब से इन नियमों का एलान किया गया था तब से ही ऑटो और टैक्सी के ड्राइवर इसका विरोध कर रहे थे। उनका कहना है था कि लगभग 60 प्रतिशत ड्राइवर ऐसे हैं जिन्हें मराठी बोलनी नहीं आती तो इस तरह का फैसला थोपना सही नहीं होगा। इसके चलते यह भी आशंका जताई जा रही थी कि अगर ड्राइवरों ने हड़ताल कर दी तो मुंबई और पुणे जैसे शहरों का बुरा हाल हो सकता है।