760 Crore food processing plant of Sukhjit Biocorn at Yeola MIDC*
Sukhjit Biocorn Plans Maize Processing Plant in Yeola MIDC
नासिक: महाराष्ट्र के येवला तालुका स्थित चिंचोंडी औद्योगिक क्षेत्र (MIDC) में कृषि आधारित खाद्य प्रसंस्करण परियोजना प्रस्तावित है। Sukhjit Biocorn Limited की ओर से प्रस्तावित इस परियोजना में मक्के से स्टार्च और स्टार्च आधारित विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जाने की योजना है। परियोजना से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
परियोजना से जुड़े निवेश को लेकर सार्वजनिक स्तर पर करीब 760 करोड़ रुपये का आंकड़ा बताया गया है। हालांकि, कंपनी से संबंधित उपलब्ध जानकारी में पूंजीगत व्यय का आंकड़ा अलग बताया गया है। इसलिए अंतिम निवेश राशि परियोजना के आगे बढ़ने और संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट होगी।
मक्का किसानों के लिए संभावित बाजार
पूर्व सांसद समीर भुजबल ने कहा कि प्रस्तावित परियोजना से नासिक जिले के मक्का उत्पादक किसानों के लिए बाजार का विस्तार हो सकता है। उनके अनुसार, परियोजना के पहले चरण में लगभग 3.50 लाख मीट्रिक टन मक्के की वार्षिक मांग पैदा होने की संभावना है। इससे स्थानीय स्तर पर मक्का की मांग बढ़ने और किसानों की आय को स्थिर करने में मदद मिल सकती है।
परियोजना के तहत मक्के से स्टार्च के साथ-साथ स्टार्च आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन की योजना है। इससे कृषि उत्पादन को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
रोजगार और औद्योगिक विकास पर संभावित असर
प्रस्तावित संयंत्र से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है। इसके अलावा, परिवहन, कृषि आपूर्ति और अन्य सहायक गतिविधियों में भी स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
समीर भुजबल ने कहा कि परियोजना से येवला तालुका और नासिक जिले में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि चिंचोंडी MIDC में बड़े उद्योग की स्थापना से क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलने की संभावना है।
परियोजना अभी प्रस्तावित चरण में
यह परियोजना फिलहाल प्रस्तावित चरण में है और इसके क्रियान्वयन के लिए आगे की प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। इसलिए निवेश, उत्पादन क्षमता, रोजगार और संचालन से जुड़े अंतिम आंकड़े परियोजना के विकास तथा संबंधित आधिकारिक घोषणाओं के बाद स्पष्ट होंगे।
परियोजना के आगे बढ़ने पर इसके प्रभाव का आकलन उत्पादन शुरू होने के बाद किसानों की मांग, रोजगार सृजन और स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों के आधार पर किया जा सकेगा।