बिलासपुर हाई कोर्ट से पूर्व सीएम भूपेश बघेल को झटका, पाटन चुनाव याचिका पर सुनवाई का रास्ता साफ
भूपेश बघेल की अर्जी खारिज, पाटन चुनाव याचिका पर आगे बढ़ेगी सुनवाई
बिलासपुर, छत्तीसगढ़: पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें विजय बघेल की ओर से दायर चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने की मांग की गई थी। 17 सितंबर 2026 को अदालत के आदेश के बाद अब चुनाव याचिका पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
क्या है मामला?
2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से भूपेश बघेल निर्वाचित हुए थे। भाजपा प्रत्याशी विजय बघेल ने उनके निर्वाचन को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मतदान से पहले निर्धारित 48 घंटे की अवधि के दौरान कथित रूप से चुनाव प्रचार किया गया, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 से संबंधित प्रावधानों के तहत विचारणीय है।
भूपेश बघेल की ओर से क्या आवेदन दिया गया था?
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त करने के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता के Order 7 Rule 11 सहित संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर आवेदन प्रस्तुत किया गया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 17 सितंबर को इस आवेदन पर आदेश सुनाया और इसे खारिज कर दिया।
अब आगे क्या होगा?
आवेदन खारिज होने के बाद विजय बघेल की ओर से दायर चुनाव याचिका की आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। मामले में आरोपों की पुष्टि या खंडन अब संबंधित साक्ष्यों और आगे होने वाली सुनवाई के दौरान किया जाएगा।
पहले भी हो चुकी है सुनवाई
इस चुनाव याचिका से संबंधित कार्यवाही पहले भी हाई कोर्ट में हुई है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, मामले में चुनाव याचिका की प्रारंभिक आपत्तियों और उसकी maintainability से जुड़े मुद्दों पर पहले भी अदालत ने विचार किया है। मई 2025 के आदेश में हाई कोर्ट ने याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने की एक आपत्ति को स्वीकार नहीं किया था।
इसके बाद मामले में आगे की कार्यवाही जारी रही। अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट में चुनाव याचिका की सुनवाई को रोकने या प्रारंभिक स्तर पर समाप्त करने की मांग में हस्तक्षेप नहीं किया और मामले में उठाए गए कानूनी एवं तथ्यात्मक पक्षों को संबंधित कार्यवाही में उठाने की गुंजाइश रखी।
पाटन चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।