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ढाई साल से अटकी नियुक्ति की राह: सुप्रीम कोर्ट ने 1,362 एएनएम अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का दिया निर्देश

By VIJAY KUMAR • 2026-08-28 06:48 • 3 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
ढाई साल से अटकी नियुक्ति की राह:  सुप्रीम कोर्ट ने 1,362 एएनएम अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का दिया निर्देश

लेखक : विजय कुमार वरिष्ठ पत्रकार

पटना : बिहार में सहायक नर्स (एएनएम/ANM) पद की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर वर्षों से चली आ रही न्यायिक लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट ने अहम राहत का रुख अपनाया है।
न्यायमूर्ति पामिदिघंटम श्री नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की खंडपीठ ने 25 अगस्त 2026 को सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत के समक्ष उपस्थित हस्तक्षेपकर्ताओं सहित 1,362 अभ्यर्थियों की नियुक्ति एएनएम पद पर की जानी चाहिए।

यह आदेश पटना उच्च न्यायालय के 29 अप्रैल 2024 के एलपीए नंबर 322/2024 के फैसले के विरुद्ध दाखिल एसएलपी (सिविल) संख्या 12696/2024 — अंजलि कुमारी बनाम अर्चना कुमारी एवं अन्य — में पारित हुआ।

मामले की पृष्ठभूमि :
यह प्रकरण बिहार तकनीकी सेवा आयोग द्वारा एएनएम पद के लिए जारी भर्ती विज्ञापन से जुड़ी नियुक्ति प्रक्रिया में देरी और विवाद से उपजा है।

एक ही आदेश में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एसएलपी संख्या 12696/2024 के साथ-साथ एसएलपी संख्या 13220/2024, 12430/2024, 19326/2024, 19327/2024, 19328/2024 तथा 2024-26 के बीच दाखिल कई डायरी नंबर और छह रिट याचिकाएं भी संयुक्त रूप से सूचीबद्ध हैं।

इनमें दर्जनों आवेदन कंडोनेशन ऑफ डिले, अंतरिम राहत, और हस्तक्षेप/इंप्लीडमेंट से जुड़े हैं — जो यह दर्शाता है कि इस भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों के अलग-अलग समूह वर्षों से समानांतर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

रिकॉर्ड ऑफ प्रोसीडिंग्स के अनुसार, 3 फरवरी 2026 के पूर्व आदेश के अनुपालन में बिहार सरकार के स्थायी अधिवक्ता श्री मनीष कुमार ने राज्य सरकार से निर्देश प्राप्त किए, जिसके बाद अदालत ने उपरोक्त निर्णय सुनाया।

“1,362 अभ्यर्थियों को एएनएम पद पर नियुक्ति दी जानी चाहिए, किंतु राज्य सरकार पहले उनकी अर्हता की पुष्टि करे” — सुप्रीम कोर्ट

आदेश में क्या निर्देश दिए गए :
अदालत के समक्ष उपस्थित हस्तक्षेपकर्ताओं सहित कुल 1,362 अभ्यर्थियों की नियुक्ति एएनएम पद पर की जानी चाहिए — यह कोर्ट की स्पष्ट राय है।

नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने से पहले राज्य सरकार यह जांच करेगी कि अभ्यर्थी आवश्यक योग्यता रखते हैं या नहीं।
इस सत्यापन एवं परीक्षण के लिए राज्य सरकार एक दो-सदस्यीय समिति गठित कर सकती है।

पूरी प्रक्रिया आज (25 अगस्त 2026) से एक महीने के भीतर पूर्ण करनी होगी।

अभ्यर्थियों के अधिवक्ताओं की सहमति से तय हुआ कि अभ्यर्थी 7 सितंबर से 12 सितंबर 2026 के बीच समिति के समक्ष उपस्थित होंगे, जिसकी सूचना उन्हें पहले से दी जाएगी।
राज्य के स्थायी अधिवक्ता मनीष कुमार अगली सुनवाई तक प्रक्रिया की पूर्णता पर निर्देश लेकर रिपोर्ट करेंगे।
मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी।

ज़मीनी सवाल :
यह आदेश राहत भरा जरूर है, पर कई सवाल बरकरार हैं।
पहला — जिन 1,362 अभ्यर्थियों के नाम अदालत के समक्ष हैं, वर्षों की मुकदमेबाजी के बाद भी उनकी नियुक्ति ‘अर्हता जांच’ की एक और शर्त के अधीन क्यों रखी गई है?
दूसरा — दर्जनों हस्तक्षेप/इंप्लीडमेंट आवेदन यह बताते हैं कि इस भर्ती में कितने और अभ्यर्थी समूह खुद को हकदार मानकर अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं — क्या राज्य सरकार की मूल चयन-सूची प्रक्रिया में शुरू से ही पारदर्शिता की कमी थी?
तीसरा — दो-सदस्यीय समिति की जांच प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष और समयबद्ध होगी, यह तभी स्पष्ट होगा जब 13 अक्टूबर को राज्य सरकार अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
चौथा — बिहार के स्वास्थ्य विभाग में एएनएम जैसे अहम पदों की नियुक्ति में इतनी लंबी देरी का सीधा असर राज्य की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं, खासकर मातृ-शिशु स्वास्थ्य ढांचे पर पड़ता है — इसकी जवाबदेही किसकी होगी?

मांग :
राज्य सरकार अर्हता-सत्यापन समिति का गठन तुरंत करे और यह प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी, समयबद्ध व सार्वजनिक रूप से सत्यापन-योग्य हो।

7 से 12 सितंबर के बीच होने वाली उपस्थिति और दस्तावेज़ सत्यापन की सूचना सभी 1,362 अभ्यर्थियों तक स्पष्ट रूप से और समय रहते पहुँचाई जाए।

स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित करे कि निर्धारित एक माह की समयसीमा किसी प्रशासनिक बहाने से आगे न खिसके, जैसा इस भर्ती के मामले में पूर्व में होता रहा है।

13 अक्टूबर की अगली सुनवाई से पहले राज्य सरकार की अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि अभ्यर्थियों व जनता के बीच भरोसा बने।

निष्कर्ष :
बिहार में एएनएम भर्ती का यह मामला सिर्फ 1,362 अभ्यर्थियों के भविष्य का सवाल नहीं, बल्कि राज्य की भर्ती-प्रणाली की साख का भी प्रश्न है।

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उम्मीद की किरण है, लेकिन असली परीक्षा अब राज्य सरकार और उसकी प्रस्तावित समिति की होगी — क्या वह एक महीने के भीतर, बिना किसी नई अड़चन के, इन अभ्यर्थियों को उनका हक दिला पाएगी?

#योग्यता जांच के लिए एक महीने में बनेगी दो-सदस्यीय समिति#अभ्यर्थी 7 से 12 सितंबर के बीच होंगे पेश — अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को#
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