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अब पानी पीने से लेकर बाइक चलाने तक में मददगार होंगे कृत्रिम हाथ, जमशेदपुर में 27-28 अक्टूबर को निःशुल्क शिविर

By SUSHIL KUMAR RAMRAIKA • 2026-10-14 10:30 • 5 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
अब पानी पीने से लेकर बाइक चलाने तक में मददगार होंगे कृत्रिम हाथ, जमशेदपुर में 27-28 अक्टूबर को निःशुल्क शिविर

माइकल जॉन ऑडिटोरियम में झारखंड, बिहार, बंगाल और ओडिशा के दिव्यांगों को मिलेगा लाभ, आधुनिक तकनीक से बने कृत्रिम हाथों का होगा वितरण

जमशेदपुर। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन को सहज बनाने की दिशा में जमशेदपुर में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। हेल्प क्राॅंस सोसायटी और पुणे की इनाली फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से 27 और 28 अक्टूबर को माइकल जॉन ऑडिटोरियम में निःशुल्क कृत्रिम हाथ वितरण शिविर आयोजित किया जाएगा। इस शिविर के माध्यम से झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के जरूरतमंद दिव्यांगजनों को लाभान्वित करने की योजना है।

शिविर में पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त राजीव रंजन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस संबंध में हेल्प क्राॅंस सोसायटी के कुलवंत सिंह बंटी, अध्यक्ष बी के शर्मा और सचिव विनोद कसेरा ने उपायुक्त से मुलाकात कर उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया।

दैनिक कामकाज से लेकर बाइक चलाने तक में मिलेगी मदद

इस शिविर की खासियत आधुनिक तकनीक से तैयार कृत्रिम हाथ हैं, जो हाथ से वंचित लोगों को रोजमर्रा के कई काम करने में सहायता प्रदान करेंगे। इनाली फाउंडेशन द्वारा निर्मित कृत्रिम हाथों की मदद से पानी पीने, लिखने और अन्य जरूरी गतिविधियों के साथ मोटरसाइकिल चलाने जैसे कार्य भी संभव हो सकेंगे। आयोजकों के अनुसार, इन कृत्रिम हाथों का उद्देश्य दिव्यांगजनों की दूसरों पर निर्भरता कम करना और उन्हें सामान्य जीवन की गतिविधियों में अधिक सक्षम बनाना है।

आत्मविश्वास और स्वावलंबन को मिलेगा बढ़ावा

हेल्प क्लास सोसाइटी के कुलवंत सिंह बंटी ने बताया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद दिव्यांगजनों को आधुनिक तकनीक का लाभ उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से दिव्यांगजनों के आत्मविश्वास को मजबूती मिलेगी और वे अपने दैनिक जीवन के कार्य अधिक आसानी से कर सकेंगे।

आयोजकों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे शिविर की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि जरूरतमंदों तक इसकी सूचना पहुंचे और वे इस निःशुल्क सुविधा का लाभ उठा सकें।

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