Kaithal News: गांव बाबा लदाना के बाबा राजपुरी डेरे में साधु की हत्या, जंजीरों से बांधकर पीटा, बाल तक उखाड़े
कैथल। गांव बाबा लदाना स्थित 550 साल पुराने ऐतिहासिक बाबा राजपुरी डेरे में बुधवार सुबह साधु शिव शंकर पुरी उर्फ राकेश की जंजीरों और रस्सियों से बांधकर डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। सुबह ग्रामीण पूजा-पाठ के लिए डेरे में पहुंचे तो विश्राम गृह में साधु का शव पड़ा मिला। उसके शरीर पर चोटों के निशान थे और आरोपियों ने उसके सिर और दाढ़ी के बाल तक उखाड़ दिए।
डीएसपी सुशील कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच के अनुसार, महंत दूजपुरी के कक्ष में जाने पर शिव शंकर पुरी का विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने पर उसे बांधकर पीटा गया जिससे उसकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही सीआईए, एंटी व्हीकल थेफ्ट स्टाफ और सदर थाना पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने वारदात के करीब एक घंटे के भीतर मुख्य महंत दूजपुरी समेत पांच आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
साधु शिव शंकर पुरी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के रहने वाले थे और करीब दो माह पहले बाबा राजपुरी डेरे में आए थे। वह डेरे के मुख्य महंत दूज पुरी के पास रह रहे थे। बुधवार सुबह डेरे में साधु के मृत अवस्था में पड़े होने की सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में अनुयायी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने डेरे में मौजूद कुछ साधुओं को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।
सरपंच की शिकायत पर दर्ज हुई प्राथमिकी
पुलिस ने बाबा लदाना के सरपंच गुरनाम सिंह की शिकायत पर थाना सदर में हत्या की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने मामले में डेरे के मुख्य महंत दूज पुरी, उसके चेले लवकेश पुरी, बाबा लदाना निवासी होशियार सिंह, रजत और रवि उर्फ भोला को हिरासत में लिया है। सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
550 साल पुराना है बाबा राजपुरी डेरा
बाबा लदाना का डेरा बाबा राजपुरी क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मान्यता है कि डेरे की स्थापना करीब 550 वर्ष पहले हुई थी। बाबा राजपुरी का जन्म 1690 में हुआ था। उन्होंने करीब आठ वर्ष की आयु में गांव बात्ता जाकर चोला धारण किया और संत सरस्वती पुरी को अपना गुरु बनाया। डेरे में बाबा राजपुरी के 360 धूणे होने की भी मान्यता है।
रामकृष्ण परमहंस के गुरु तोतापुरी को भी इस डेरे की परंपरा से जोड़ा जाता है। तोतापुरी डेरे के प्रमुख महंतों में रहे। रामकृष्ण परमहंस आगे चलकर स्वामी विवेकानंद के गुरु बने। डेरे की महंत परंपरा में सिद्ध पुरी, भंडार पुरी, शुद्ध पुरी, ज्ञान पुरी, तोतापुरी, चेतनपुरी और हजारी पुरी जैसे संतों के नाम शामिल हैं। वर्तमान में दूजपुरी मुख्य महंत हैं।
चार बार होती है आरती, 31 ज्योत जगाने की परंपरा
डेरे में प्रतिदिन चार बार आरती होती है। पहली आरती सुबह चार बजे, भोग आरती दोपहर 11:30 बजे, तीसरी आरती दोपहर तीन बजे और इसके बाद शाम को संध्याकालीन आरती होती है। यहां धार्मिक परंपरा के अनुसार 31 ज्योत भी जगाई जाती हैं। बाबा राजपुरी की पूजा, बात्ता डेरे का भंडारा और क्योड़क की अलख क्षेत्र में प्रसिद्ध है। डेरे में दशहरे के बाद तीन दिन का विशाल धार्मिक मेला लगता है। चांदनी एकादशी पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले के अंतिम दिन राज्य स्तरीय कुश्ती दंगल कराया जाता है। श्रद्धालु यहां दूध, घी और आटा चढ़ाते हैं। दूध चढ़ाने से पशुधन में वृद्धि और सुख-शांति की मान्यता के कारण इसे दूधाधारी बाबा का डेरा भी कहा जाता है।