UGC Rollback की मांग को लेकर सवर्ण समाज मुखर, चार प्रमुख मांगों पर सरकार से जवाब की मांग
नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2026 के इक्विटी रेगुलेशंस को लेकर सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों का विरोध लगातार जारी है। सवर्ण आर्मी सहित विभिन्न संगठनों ने UGC के नियमों को वापस लेने यानी UGC Rollback की मांग उठाते हुए सरकार से सामान्य वर्ग के हितों को ध्यान में रखकर नीतियों की समीक्षा करने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए नियम सभी वर्गों के विद्यार्थियों के लिए समान और निष्पक्ष होने चाहिए। उनका आरोप है कि नए नियमों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के हितों और झूठी शिकायतों से सुरक्षा को लेकर पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं। इसी को लेकर सवर्ण समाज ने सरकार के समक्ष अपनी चार प्रमुख मांगें रखी हैं।
सवर्ण समाज की चार प्रमुख मांगें
1. UGC के नए इक्विटी रेगुलेशंस को वापस लिया जाए
संगठनों ने 2026 में अधिसूचित UGC इक्विटी नियमों को तत्काल वापस लेने अथवा व्यापक समीक्षा के बाद नए सिरे से तैयार करने की मांग की है।
2. आरक्षण का आधार आर्थिक किया जाए
सवर्ण समाज की मांग है कि आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्राथमिकता दी जाए और अवसरों को आर्थिक स्थिति के आधार पर भी सुनिश्चित किया जाए।
3. SC/ST एक्ट में बदलाव अथवा समाप्ति की मांग
प्रदर्शनकारियों ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून में बदलाव की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए।
4. सवर्ण आयोग का गठन किया जाए
सवर्ण समाज के संगठनों ने सामान्य वर्ग से जुड़े सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक मुद्दों के समाधान के लिए अलग सवर्ण आयोग गठित करने की मांग की है।
सरकार से संवाद की अपील
संगठनों का कहना है कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में सभी वर्गों को समान अवसर मिलना चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी कानून या नियम का उद्देश्य समाज में विभाजन पैदा करना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और सुरक्षा देना होना चाहिए।
गौरतलब है कि UGC के 2026 इक्विटी रेगुलेशंस पर सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में रोक लगाई थी और नियमों की कुछ धाराओं को लेकर अस्पष्टता तथा संभावित दुरुपयोग की आशंका पर सवाल उठाए थे। अगस्त 2026 में केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष नियमों पर पुनर्विचार किए जाने की जानकारी दी है।
सवर्ण समाज के संगठनों ने सरकार से मांग की है कि सभी पक्षों से व्यापक संवाद कर ऐसा समाधान निकाला जाए, जिसमें समानता, निष्पक्षता और सभी वर्गों के अधिकारों का संतुलन बना रहे।