NEET-UG विवाद से इस्तीफे तक: एक महीने का धरना, वांगचुक का अनशन और आखिरकार शिक्षा मंत्री की कुर्सी गई
जंतर-मंतर से उठी छात्रों की आवाज ने बढ़ाया दबाव; कथित पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर देशभर में उबाल, अब सवाल—क्या सिर्फ इस्तीफे से खत्म होगा संकट?
NEET-UG 2026 का विवाद अब सिर्फ परीक्षा में कथित गड़बड़ियों तक सीमित नहीं रहा। छात्रों का गुस्सा सड़क पर उतरा, जंतर-मंतर पर एक महीने से ज्यादा समय तक धरना चला, सोनम वांगचुक के अनशन ने आंदोलन को नई धार दी और आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक मामला पहुंच गया।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
NEET-UG 2026 के नतीजों के बाद कथित पेपर लीक, परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं और ग्रेडिंग को लेकर सवाल उठे। छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। कुछ छात्रों पर पड़े असाधारण दबाव और आत्महत्या की खबरों ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया।
मुद्दा धीरे-धीरे एक परीक्षा के नतीजों से आगे बढ़कर युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में भरोसे का सवाल बन गया।
जंतर-मंतर बना आंदोलन का केंद्र
20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों, अभिभावकों और समर्थकों का धरना शुरू हुआ। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में चले इस आंदोलन में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, कथित पेपर लीक की स्वतंत्र जांच, दोषियों पर कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को मुआवजे की मांग प्रमुख रही।
दिन बीतते गए, लेकिन प्रदर्शनकारियों का दबाव कम नहीं हुआ। जंतर-मंतर पर जारी धरना धीरे-धीरे NEET विवाद का सबसे बड़ा सार्वजनिक चेहरा बन गया।
वांगचुक के अनशन ने बदली आंदोलन की तस्वीर
आंदोलन को उस वक्त नई ऊर्जा मिली, जब लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने छात्रों के समर्थन में अनशन का ऐलान किया। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक भूख हड़ताल की चेतावनी ने इस मुद्दे को और व्यापक बना दिया।
अब यह सिर्फ छात्रों का आंदोलन नहीं दिख रहा था। जंतर-मंतर से उठी आवाज संसद और सत्ता के गलियारों तक पहुंच चुकी थी।
आखिरकार प्रधान का इस्तीफा
24-25 जुलाई की रात बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके इस्तीफे के साथ आंदोलन ने एक बड़ा राजनीतिक पड़ाव जरूर पार कर लिया, लेकिन छात्रों के सवाल अभी बाकी हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या?
क्या कथित पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होगी? क्या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी? और क्या NEET जैसी परीक्षा व्यवस्था में ऐसे सुधार किए जाएंगे, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा दोबारा कायम हो सके?
NEET-UG 2026 का विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसने दिखाया कि परीक्षा सिर्फ एक परीक्षा नहीं होती—यह लाखों युवाओं के सपनों, परिवारों की उम्मीदों और देश की शिक्षा व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ी होती है।
जंतर-मंतर पर उठी आवाज ने सत्ता को झुकाया है या नहीं, इसका अंतिम आकलन आने वाले दिनों में होगा। लेकिन इतना तय है कि NEET-UG 2026 का विवाद भारतीय शिक्षा व्यवस्था के इतिहास में एक बड़ा सवाल छोड़ गया है—युवाओं के भविष्य की जवाबदेही आखिर किसकी है?