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प्रतापगढ़ मेडिकल कॉलेज खरीद घोटाला: अपर मुख्य सचिव की 3 दिन की मियाद पूरी, अब शासन की कार्रवाई का इंतजार

By LOK NATH PANDEY • 2026-09-11 09:13 • 22 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
प्रतापगढ़ मेडिकल कॉलेज खरीद घोटाला: अपर मुख्य सचिव की 3 दिन की मियाद पूरी, अब शासन की कार्रवाई का इंतजार

प्रतापगढ़ मेडिकल कॉलेज में 64.93 लाख रुपये के कथित दुरुपयोग मामले में तीन दिन की समयसीमा पूरी

प्रतापगढ़: राजकीय मेडिकल कॉलेज में खरीदारी से जुड़े 64.93 लाख रुपये के कथित दुरुपयोग के मामले में अपर मुख्य सचिव अमित घोष की ओर से दी गई तीन दिन की समयसीमा पूरी हो गई है। अब मामले में शासन स्तर पर होने वाली आगे की कार्रवाई पर नजर है।

लोक लेखा समिति के समक्ष अपर मुख्य सचिव ने मामले में तीन दिनों के भीतर कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया था। समयसीमा पूरी होने के बाद अब यह देखा जाना है कि शासन स्तर से मामले में क्या निर्णय लिया जाता है।

जेम पोर्टल से खरीदारी से जुड़ा है मामला

मामला राजकीय मेडिकल कॉलेज में जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदारी से संबंधित है। उपलब्ध शिकायत और जांच संबंधी जानकारी के अनुसार, आरोप है कि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की ओर से वित्त नियंत्रक की सहमति के बिना कुछ महंगी वस्तुओं की खरीद की गई।

खरीद प्रक्रिया और नियमों के अनुपालन को लेकर सवाल उठाए गए थे। इस संबंध में विभिन्न समाचार रिपोर्टों के माध्यम से भी मामला सामने आया था।

जिलाधिकारी के निर्देश पर कराई गई जांच

मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से जांच कराई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच में समाचार रिपोर्टों में उठाए गए कुछ प्रमुख बिंदुओं की पुष्टि होने की बात सामने आई।

जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में 64.93 लाख रुपये की धनराशि के कथित दुरुपयोग का उल्लेख किया गया है। हालांकि, अंतिम जिम्मेदारी और शासन स्तर पर कार्रवाई का निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

अब शासन के फैसले पर नजर

तीन दिन की समयसीमा पूरी होने के बाद मामले में शासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई या जिम्मेदारी का निर्धारण आधिकारिक आदेश और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

नोट: इस मामले में लगाए गए आरोप और जांच में सामने आए निष्कर्षों को अंतिम दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अंतिम स्थिति संबंधित जांच, आधिकारिक रिकॉर्ड और शासन के निर्णय के आधार पर स्पष्ट होगी।

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